विलुप्त प्रजाति गिद्धों को बचाने की अनोखी पहल, रायसेन में 5 गिद्ध खुले आसमान में मुक्त

Raisen Vulture Conservation: मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के सांची स्थित हलाली डैम वनक्षेत्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उपचार के बाद 5 गिद्धों को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा. इनमें 1 सिनेरियस और 4 लॉन्ग-बिल्ड गिद्ध शामिल हैं. यह पहल प्रदेश में विलुप्तप्राय गिद्धों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. 

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मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. सांची क्षेत्र में 23 फरवरी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में घायल गिद्धों का उपचार और पुनर्वास करने के बाद उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया.

सांची और हलाली डैम वनक्षेत्र में संरक्षण अभियान

सांची स्थित हलाली डैम वनक्षेत्र में मोहन यादव ने पांच गिद्धों को मुक्त किया. इन गिद्धों को प्रदेश के अलग-अलग जिलों से रेस्क्यू कर इलाज और देखभाल के बाद प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा गया. 

कौन-कौन सी प्रजाति के गिद्ध शामिल

  • 1 सिनेरियस गिद्ध (Cinereous Vulture)
  • 4 लॉन्ग-बिल्ड गिद्ध (Long-billed Vulture)

इनमें चार देशी और एक विदेशी प्रजाति का गिद्ध शामिल है. विशेषज्ञों के अनुसार, गिद्धों की संख्या में आई भारी गिरावट के बीच यह पहल उनके संरक्षण और प्रजनन के लिए अहम साबित होगी.

गीदगढ़: गिद्धों का प्राकृतिक आवास

रायसेन जिले में एक गांव गीदगढ़ के नाम से भी जाना जाता है, जिसे गिद्धों का प्राकृतिक आवास माना जाता है. यहां का वनक्षेत्र और आसपास का पर्यावरण इन पक्षियों के लिए अनुकूल है.

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क्यों जरूरी है गिद्ध संरक्षण?

गिद्धों की घटती संख्या देशभर में चिंता का विषय रही है. दवाओं के दुष्प्रभाव और पर्यावरणीय बदलाव के कारण इनकी आबादी में भारी कमी आई थी. ऐसे में उपचार, पुनर्वास और प्राकृतिक आवास में पुनर्स्थापन की यह पहल वन्यजीव संरक्षण की दिशा में सकारात्मक संकेत मानी जा रही है. वन विभाग का मानना है कि इस तरह की पहल से प्रदेश में गिद्धों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी और जैव विविधता संतुलित रहेगी.

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