रायसेन में पुल हादसा! रिपेयरिंग के दौरान 50 फीट हिस्सा गिरा, चार लोग घायल, सुरक्षा व्यवस्थाओं पर उठे सवाल

रायसेन के Bareli–Pipariya मार्ग पर पुराना पुल Repair work के दौरान अचानक ढह गया, जिसमें चार लोग घायल हो गए. इस Raisen bridge collapse ने MPRDC की कार्यप्रणाली और Road safety negligence पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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Raisen Bridge Collapse: रायसेन जिले के बरेली–पिपरिया मार्ग पर नया गांव पुल का बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया. पुल की रिपेयरिंग का काम कई दिनों से चल रहा था, लेकिन इसके बावजूद आवागमन बंद नहीं किया गया. हादसे में दो बाइक सवार नीचे गिर पड़े और चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. इस घटना ने एमपीआरडीसी की कार्यप्रणाली और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

पुल का 50 फीट हिस्सा अचानक गिरा

रायसेन के नया गांव स्थित यह पुल करीब 40–50 साल पुराना बताया जा रहा है. बीते आठ दिनों से यहां मरम्मत का काम चल रहा था. काम के दौरान अचानक पुल का करीब 50 फीट हिस्सा ढह गया. नीचे मौजूद मजदूर घटना से कुछ ही क्षण पहले भाग निकले, वरना बड़ा हादसा हो सकता था.

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आवागमन चालू, सुरक्षा नहीं 

सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब पुल पर रिपेयरिंग चल रही थी, तो मार्ग बंद क्यों नहीं किया गया? भारी वाहनों को क्यों गुजरने दिया गया? काम के दौरान मजदूर बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के पुल के नीचे काम कर रहे थे. ग्रामीणों का कहना है कि पुल वर्षों से क्षतिग्रस्त था, लेकिन इसकी समय पर मरम्मत या सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया.

बाइक सवार नीचे गिरे, चार घायल

हादसे के समय पुल से गुजर रहे दो बाइक सवार नीचे गिर गए. उनमें से चार लोग गंभीर रूप से घायल हुए. मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें बाहर निकाला. प्राथमिक इलाज के बाद चारों को स्थिति गंभीर होने पर भोपाल रेफर कर दिया गया.

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अधिकारियों और मंत्री ने मौके पर पहुंचे  

हादसे की सूचना मिलते ही एमपीआरडीसी के अधिकारी, इंजीनियर और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल मौके पर पहुंचे. मंत्री ने पुल की हालत और मरम्मत कार्य का निरीक्षण किया.

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पुराने पुलों की तत्काल जांच के आदेश

घटना के बाद मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि प्रदेश में जितने भी 40 वर्ष से अधिक पुराने पुल हैं चाहे वे स्टेट हाईवे पर हों या नेशनल हाईवे पर उनकी तुरंत जांच कर सुरक्षित किया जाए. उन्होंने कहा कि ऐसे हादसे लापरवाही का परिणाम हैं और अब किसी भी हालत में सुरक्षा से समझौता स्वीकार नहीं है.

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ग्रामीणों का गुस्सा- वर्षों से खराब था पुल

स्थानीय लोगों ने बताया कि यह पुल लंबे समय से खराब स्थिति में था और कई बार शिकायतें भी की गईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. ग्रामीणों ने कहा कि विभाग केवल हादसे के बाद जागता है, जबकि समय पर मरम्मत और सुरक्षा से कई जानें बचाई जा सकती थीं.

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