Panna Tiger Attack: मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से इंसानी हिम्मत और एकजुटता की मिसाल पेश करने वाली एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है. यहां जंगल में महुआ बीनने गई एक महिला पर बाघ ने हमला कर दिया, लेकिन मौके पर मौजूद ग्रामीण डरकर भागे नहीं. उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालते हुए बाघ का सामना किया और महिला को उसके जबड़े से छुड़ा लिया. यह घटना न सिर्फ साहस की कहानी है, बल्कि जंगल में बढ़ते मानव‑वन्यजीव संघर्ष की गंभीर तस्वीर भी दिखाती है.
महुआ बीनते समय हुआ अचानक हमला
जानकारी के मुताबिक, यह घटना पन्ना जिले के उत्तर वन मंडल की विश्रामगंज रेंज की है. 35 वर्षीय रामकली कोंदर रोज की तरह महुआ बीनकर अपने साथियों के साथ घर लौट रही थीं. जंगल के झाड़ियों वाले रास्ते में अचानक घात लगाए बैठे एक बाघ ने उन पर झपट्टा मार दिया. किसी को संभलने का मौका भी नहीं मिला.
टांग पकड़कर जंगल की ओर घसीटने लगा बाघ
बाघ ने रामकली की टांग पकड़ ली और उन्हें घसीटते हुए घने जंगल की ओर ले जाने लगा. महिला दर्द से चीखती रही. यह देख साथ चल रहे ग्रामीणों के पैरों तले जमीन खिसक गई, लेकिन उन्होंने भागने के बजाय साहस दिखाने का फैसला किया. ग्रामीणों ने शोर मचाना शुरू किया और पास पड़ी लकड़ियों से बाघ पर हमला कर दिया. अचानक हुए इस विरोध से बाघ घबरा गया. कुछ ही पलों में उसने महिला को छोड़ दिया और जंगल की गहराई में भाग निकला. ग्रामीणों की हिम्मत ने एक जान बचा ली.
इलाज के लिए कंधों पर लादकर पहुंचे गांव
घटना के बाद समस्या और बढ़ गई क्योंकि इलाके में मोबाइल नेटवर्क नहीं था. ग्रामीणों ने कपड़े बांधकर महिला के घाव से बह रहा खून रोका. इसके बाद घायल महिला को कंधों पर लादकर करीब दो किलोमीटर का दुर्गम और जंगलनुमा रास्ता तय कर गांव तक पहुंचाया गया.
जिला अस्पताल में इलाज जारी
सूचना मिलने पर वन विभाग और प्रशासन सक्रिय हुआ. महिला को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है. वन विभाग ने पीड़िता को तत्काल आर्थिक सहायता दी है और आगे की मदद का भरोसा भी दिलाया है. वन विभाग ने इस घटना के बाद ग्रामीणों को सख्त हिदायत दी है कि महुआ सीजन के दौरान अकेले जंगल न जाएं. अधिकारियों ने कहा है कि जंगली इलाकों में बाघों की गतिविधि बढ़ी है, ऐसे में समूह में जाना और सतर्क रहना बेहद जरूरी है.