बहुमूल्य ‘शजर पत्थर’ उगलती है एमपी की यह नदी, दुनिया की इकलौती नदी जहां मिलता है ये बेशकीमती रत्न

Nature's Painting Stone: बेशकीमती रत्न शजर पत्थर वाली दुनिया की इकलौती नदी केन नदी से निकलने वाले रत्न की कीमत अनमोल है. शजर रत्न की कीमत लाखों में आंकी जाती है. इससे निर्मित आभूषणों की कीमत करोड़ों में होती है, जो राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बेहद लोकप्रिय रत्न हैं.

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MADHYA PRADESH KEN RIVER PRODUCED PRECIOUS 'SHAJAR STONE

Shajar Stone of Ken River:  मध्य प्रदेश का पन्ना जिला हीरों की खदानों के लिए तो दुनियाभर में मशहूर है. लेकिन बांदा उत्तर प्रदेश और पन्ना मध्य प्रदेश की सरहद से बहने वाली केन नदी भी बेशकीमती पत्थर उगलती है. जी हां,  पन्ना जिले के हीरों से कुछ किमी दूर बहने वाली केन नदी बहुमूल्य शजर पत्थर के लिए मशहूर है.

बेशकीमती रत्न शजर पत्थर वाली दुनिया की इकलौती नदी केन नदी से निकलने वाले रत्न की कीमत अनमोल है. शजर रत्न की कीमत लाखों में आंकी जाती है. इससे निर्मित आभूषणों की कीमत करोड़ों में होती है, जो राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बेहद लोकप्रिय रत्न हैं.

शजर पत्थर क्यों है खास?

लाखों साल पुराने जीवाश्मों से बना शजर पत्थर की खूबी यह है कि जब इसे काटा जाता है, तो इसके भीतर मौजूद प्राकृतिक आकृतियां, पत्तियां, शैवाल, फंगस के निशान बेहद सुंदर डिज़ाइन की तरह उभर आते हैं. प्रकृति द्वारा बनाई गई इन आकृतियों के कारण इसे 'Nature's Painting Stone' भी कहा जाता है.

केन नदी में कहां मिलता है शजर पत्थर?

गौरतलब है उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से बहने वाली केन नदी की पूरी नदी में शजर पत्थर नहीं मिलता है. यह बेशकीमती पत्थर बांदा-पन्ना बॉर्डर पर नदी की एक विशेष जगह पर मिलती है, जिसे गोताखोर गहराई में उतरकर तलाश करते हैं. कहा जाता है कि हजारों साधारण पत्थरों के बीच से शजर पत्थर पहचानना बेहद कठिन काम होता है.

उत्तर प्रदेश के बांदा और मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के सरहद से बहने वाली केन नदी से निकलने वाला प्राचीन जीवाश्म शजर पत्थर क्षेत्र की भूगर्भीय विशेषताओं को दर्शाता है. इस अनोखे पत्थर को तराशकर बनाए जाने वाले अंगूठी, हार, कान की बाली जैसे गहनों की विदेशों में भारी मांग है.

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राष्ट्रीय पहचान: ‘वन डिस्ट्रिक्ट–वन प्रोडक्ट' में शामिल

शजर पत्थरों से आभूषण बनाने वाले कारीगर द्वारिका सोनी बताते हैं, 'शजर पत्थर को एक जिला, एक उत्पाद (ODOP) में शामिल किया गया है. जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शजर पत्थर से बना उपहार सऊदी अरब के प्रिंस को दिया था, तब इसकी मांग अचानक बढ़ गई. G-20 शिखर सम्मेलन में भी विदेशी मेहमानों को शजर आभूषण दिखाए गए, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी पहचान और मजबूत हुई.

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600 साल से शजर तराशी की परंपरा चली आ रही

शजर पत्थर तराशने और आभूषण बनाने का काम सिर्फ सरहदी राज्य यूपी के बांदा जिले में होता है. 600 साल से चली आ रही शजर तराशी यहां के कारीगर पीढ़ियों सेआगे बढ़ा रहे हैं. भूगर्भ वैज्ञानिकों के अनुसार, बुंदेलखंड का यह इलाका लाखों साल पहले भूगर्भीय हलचलों का केंद्र रहा होगा. इसी वजह से यहां इतने प्राचीन जीवाश्म पत्थर मिलते हैं.

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एक जिला, एक उत्पाद (ODOP) में शामिल शजर पत्थर से बना उपहार जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब के प्रिंस को दिया, तब इसकी मांग अचानक बढ़ गई. G-20 शिखर सम्मेलन में भी यह विदेशी मेहमानों के आकर्षण का केंद्र बना, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान बनी..

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खतरे में शजर पत्थर: केन नदी में अंधाधुंध खनन से संकट

बुंदेलखंड के समाजसेवी आशीष सागर बताते हैं, 'बड़े पैमाने पर मशीनों से मोरंग का अवैध खनन शजर पत्थर के अस्तित्व के लिए खतरा बन गया है. नदी की प्राकृतिक रेत हटने से शजर पत्थर बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है. सरकार को शजर पत्थर आधारित कुटीर उद्योग को संरक्षण और बढ़ावा देने की जरूरत है.'

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पन्ना के हीरों की तरह ही बुंदेलखंड की पहचान है शजर पत्थर 

उल्लेखनीय है पन्ना के हीरों की तरह ही शजर पत्थर भी बुंदेलखंड की पहचान है. एक ऐसा दुर्लभ रत्न जो प्रकृति ने लाखों साल में गढ़ा है. लेकिन अवैध खनन और उपेक्षा के कारण इस अनोखी धरोहर पर संकट मंडरा रहा है. स्थानीय कारीगरों और नदी की पारिस्थितिकी को बचाया गया, तो शजर पत्थर दुनिया में भारत का नाम और रोशन कर सकता है.

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