पन्ना जिले के महिला एवं बाल विकास विभाग में फर्जीवाड़े का एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है. समीक्षा बैठक के दौरान खुलासा हुआ कि जिले की 217 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं अपने आवंटित गांवों में रहने के बजाय 10 किलोमीटर से लेकर 216 किलोमीटर दूर बड़े शहरों में रहकर 'अप-डाउन' का खेल चला रही थीं.
216 किमी दूर जबलपुर से आकर सिर्फ खानापूर्ति
जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार, हद तो तब हो गई जब पडरहा केंद्र की कार्यकर्ता 216 किलोमीटर दूर जबलपुर से महीने में महज एक या दो बार आकर सिर्फ औपचारिक खानापूर्ति कर रही थीं. इसके अलावा छतरपुर (91 किमी दूर) और कटनी से भी रोजाना या हफ्ते में आवागमन का खेल धड़ल्ले से चल रहा था. कई कार्यकर्ता तो पिछले कई महीनों से अपने केंद्रों से पूरी तरह नदारद पाई गईं, जिससे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली पोषण योजनाएं ठप पड़ी रहीं.
DP-O का कड़ा रुख, अधिकारियों को नोटिस जारी
शासकीय नियमों की खुलेआम उड़ती धज्जियां देख जिला कार्यक्रम अधिकारी (DP-O) अवधेश कुमार सिंह ने सख्त रुख अख्तियार किया है. उन्होंने संबंधित परियोजना अधिकारियों (CDPO) को कारण बताओ नोटिस थमाते हुए अब तक की गई कार्रवाई और एक-एक पाई का हिसाब मांगा है. DP-O ने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश नहीं की गई, तो लापरवाह अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी.
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