राज्यसभा के लिए कांग्रेस में नए चेहरों की दावेदारी हुई तेज, दिग्विजय सिंह खुद को कर चुके हैं अलग

मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की तारीख नजदीक आते ही कांग्रेस पार्टी में हलचल तेज हो गई है. एक तरफ नेता अपनी-अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं. वहीं, पार्टी जातीय समीकरण साधने के लिए माथापच्ची कर रही है. इस रिपोर्ट में पढ़ें कि राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस में क्या कुछ चल रहा है. आंकड़े होने के बाद क्यों डरे हैं कांग्रेस नेता.

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राज्यसभा के लिए कांग्रेस में नए चेहरों की दावेदारी हुई तेज
Akash Dwivedi

मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस के भीतर हलचल तेज हो गई है. पार्टी की एक मात्र सीट बचाने की चुनौती के बीच अब दिल्ली से भोपाल तक बैठकों, लॉबिंग और राजनीतिक गणित का दौर शुरू हो चुका है. दिलचस्प बात ये है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खुद राज्यसभा नहीं जाने के संकेत देने के बाद कांग्रेस में नए चेहरों की दावेदारी अचानक तेज हो गई है… लेकिन अब पार्टी के भीतर ही दिग्विजय समर्थक उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजने की मांग भी उठा रहे हैं. वहीं, कांग्रेस अब सिर्फ सीट जीतने नहीं, बल्कि जातीय और सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति पर भी काम कर रही है.

दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की मुलाकात ने मध्य प्रदेश कांग्रेस की राजनीति को अचानक गरम कर दिया है. बताया जा रहा है कि खरगे के साथ बैठक में राज्यसभा चुनाव के समीकरण, संगठन की स्थिति और आगामी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई. सिंघार ने प्रदेश संगठन को लेकर फीडबैक रिपोर्ट भी सौंपी, जिसके बाद यह चर्चा तेज हो गई कि कांग्रेस अब सिर्फ सीट जीतने के लिए नहीं, बल्कि बड़ा सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने की तैयारी में है.

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दिग्गी राजा कर चुके हैं चुनाव लड़ने से इनकार

दरअसल, दिग्विजय सिंह पहले ही साफ कर चुके हैं कि वह इस बार राज्यसभा नहीं जाना चाहते है. साथ ही उन्होंने अनुसूचित जाति वर्ग से किसी नए चेहरे को मौका देने की बात भी कही थी, लेकिन दिलचस्प बात ये है कि दिग्विजय के पीछे हटने के बाद भी कांग्रेस के भीतर उनके समर्थक उन्हें ही सबसे सुरक्षित चेहरा बता रहे हैं. पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने खुले तौर पर कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में दिग्विजय सिंह का अनुभव पार्टी के लिए जरूरी है, लेकिन जब दिग्विजय सिंह से राज्यसभा को लेकर सवाल पूछा गया, तो वे चुप्पी साधे रहे. ये नाम हैं सुर्खियों में फिलहाल, कांग्रेस पार्टी में राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर जिन नामों की चर्चा हो रही है. इनमें पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, कमलेश्वर पटेल, अरुण यादव, मीनाक्षी नटराजन और दिग्विजय सिंह के नाम सबसे ऊपर है. 

जातीय समीकरण साधने में जुटी कांग्रेस 

मध्य प्रदेश की 11 राज्यसभा सीटों में कांग्रेस के पास फिलहाल सिर्फ तीन सीटों का राजनीतिक स्पेस माना जाता है. इनमें विवेक तन्खा ब्राह्मण समाज से आते हैं, जबकि अशोक सिंह OBC वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी OBC समाज से आते हैं. वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार आदिवासी समाज का बड़ा चेहरा है. ऐसे में अब कांग्रेस के भीतर यह चर्चा तेज है कि पार्टी दलित वर्ग या दलित महिला चेहरे पर दांव लगा सकती हैं. दरअसल, बीजेपी के आठ राज्यसभा सांसदों में तीन महिलाएं हैं. ऐसे में कांग्रेस भी सामाजिक और जेंडर बैलेंस का बड़ा संदेश देने की कोशिश कर सकती है.

ये है कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती

इस वक्त कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने विधायकों को एकजुट रखने की है. दरअसल, राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोट जरूरी हैं. संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस के पास बढ़त तो है, लेकिन तस्वीर उतनी आसान नहीं मानी जा रही है. दरअसल कांग्रेस विधायक रहे राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म हो चुकी है. आर्थिक धोखाधड़ी के मामले में सजा के बाद वे विधानसभा से अयोग्य घोषित किए जा चुके हैं. वहीं, विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के चलते वोटिंग नहीं कर पाएंगे. इनके अलावा, निर्मला सप्रे के भी कांग्रेस के पक्ष  में वोट करने की संभावना न के बराबर है. यानी कांग्रेस के पास आंकड़े तो हैं, लेकिन हर वोट की अहमियत भी बढ़ गई है. यही वजह है कि पार्टी को क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग का डर भी सताने लगा है, क्योंकि अगर बीजेपी तीसरा उम्मीदवार उतार देती है, तो मुकाबला बेहद दिलचस्प और तनावपूर्ण हो सकता है. 

कांग्रेस विधायक अपने प्रत्याशी को जिताएंगे

वहीं, कांग्रेस अपनी सीट जीतने के लिए आश्वस्त तो दिख रही है, लेकिन हॉर्स ट्रेडिंग  का डर भी सता रहा है. नेता प्रतिपक्ष  उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस पार्टी जो प्रत्याशी घोषित करेगी, उनके पक्ष में मतदान होगा. कांग्रेस विधायक अपने प्रत्याशी को जिताएंगे. कांग्रेस पार्टी पूरी तरह अलर्ट और सजग है. हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका है, क्योंकि बीजेपी खरीद फरोख्त में लगी रहती है. कांग्रेस पार्टी पूरी तरह सजग और तैयार है. 

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कांग्रेस के सिर फुटव्वल पर भाजपा ले रही चुटकी

राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस नेताओं लॉबिंग और खींचतान के बीच भाजपा कांग्रेस नेताओं की चुटकी ले रही है. इसी कड़ी में बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस की सारी सभाएं बिगड़ी हुई है. इसके साथ ही राज्यसभा भी बिगड़ी हुई है. कांग्रेस नेताओं में एक-दूसरे को नीचा दिखाने का कंपटीशन चल रहा है. उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस जैसी चल रही है, उतने दिन और ऐसे ही चले. 

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ऐसे में फिलहाल कांग्रेस में राज्यसभा की यह लड़ाई सिर्फ एक सीट की नहीं, बल्कि यह उस सवाल की लड़ाई भी बन गई है कि पार्टी भविष्य में किस चेहरे पर भरोसा करना चाहती है. अब देखना ये होगा कि पार्टी आलाकमान अनुभव, जातीय संतुलन, संगठन क्षमता  में से किसे तरजीह देता है. सबसे दिलचस्प बात ये है कि दिग्विजय सिंह के “नहीं” कहने के बाद भी कांग्रेस अब तक “दिग्विजय के बाद कौन ?” का जवाब साफ तरीके से तय नहीं कर पाई है.

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