MP Hailstorm: एमपी में गिरे नींबू के आकार के ओले! सड़कों पर बिछी सफेद चादर, ग्वालियर में टूटा 50 साल का रिकॉर्ड

मध्य प्रदेश में अचानक बदले मौसम ने तबाही मचा दी. ग्वालियर समेत कई जिलों में नींबू और चने के आकार के ओले गिरे, सड़कों पर सफेद चादर बिछ गई. ग्वालियर में 50 साल का मौसम रिकॉर्ड टूट गया. ओलावृष्टि और तेज बारिश से लोग घायल हुए, वाहन क्षतिग्रस्त हुए और किसानों की गेहूं‑चना की फसलों को भारी नुकसान की आशंका है.

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MP Hailstorm Today: मध्य प्रदेश में एक बार फिर मौसम ने अचानक ऐसा करवट ली कि जनजीवन और खेती दोनों पर भारी असर पड़ा. तेज आंधी, मूसलाधार बारिश और नींबू और चने के आकार के ओलों ने कई जिलों में तबाही मचा दी. ग्वालियर संभाग समेत पूरे प्रदेश में सड़कों से लेकर खेतों तक सफेद चादर बिछ गई. ग्वालियर में तो ओलावृष्टि ने बीते 50 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया. इस बेमौसम आफत में लोग घायल हुए, वाहन क्षतिग्रस्त हुए और किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिरने का खतरा मंडराने लगा है.

ग्वालियर: रिकॉर्ड तोड़ ओलावृष्टि, 6 घायल

ग्वालियर शहर और आसपास के इलाकों में मौसम ने सबसे ज्यादा कहर बरपाया. दोपहर बाद तेज बारिश के साथ लगातार दो बार ओलावृष्टि हुई. मौसम विभाग के मुताबिक, दोपहर 3:50 से 4:05 बजे के बीच करीब 2.5 सेंटीमीटर व्यास के ओले गिरे, जो पिछले 50 वर्षों में एक दुर्लभ घटना मानी जा रही है. इससे पहले लगभग 10 मिनट तक 1.5 सेंटीमीटर आकार के ओले भी पड़े.

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इस अचानक आई आफत में शहर के अलग‑अलग इलाकों में 2 महिलाओं सहित कुल 6 लोग घायल हो गए. तेज बारिश के चलते एक निजी अस्पताल की दीवार गिर गई, जबकि कई चार पहिया वाहन क्षतिग्रस्त हो गए. सड़कों पर ओलों की मोटी परत जम गई, जिससे पूरा शहर मानो बर्फ की सफेद चादर में ढक गया हो.

भिंड: आंधी-बारिश से राहत, किसानों की बढ़ी चिंता

भिंड जिले में भी बेमौसम तेज आंधी और बारिश का असर देखने को मिला. लहार तहसील के दर्जनों गांवों में तेज हवाओं के साथ हल्की ओलावृष्टि हुई, जबकि शहर में केवल बूंदाबांदी दर्ज की गई. इस बदलाव से लोगों को भीषण गर्मी से कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन किसानों की चिंता बढ़ गई है. खेतों में कटी पड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है. किसान अब फसल खराब होने के डर से परेशान नजर आ रहे हैं.

बैतूल: खेत, आंगन और सड़कें बर्फ से ढकी

बैतूल जिले की मुलताई तहसील में मौसम ने सबसे भयावह रूप दिखाया. दोपहर बाद अचानक तेज आंधी, तूफान और भीषण ओलावृष्टि शुरू हो गई. कुछ ही देर में खेत, आंगन और सड़कें बर्फ जैसी सफेद चादर से ढक गईं. मुलताई, परमंडल और आसपास के इलाकों में नजारा ऐसा लगने लगा मानो कश्मीर की वादियां यहां उतर आई हों. लेकिन यह खूबसूरत दृश्य किसानों के लिए बहुत दर्दनाक साबित हुआ. गेहूं, चना और अन्य खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं. पहले से मौसम की मार झेल रहे किसान इस ओलावृष्टि के बाद पूरी तरह टूट चुके हैं.

मुरैना: चने के आकार के ओले, गेहूं की फसल पर खतरा

मुरैना जिले के कई इलाकों में बारिश के साथ चने के आकार के ओले गिरे. कैलारस से लेकर मुरैना के कुम्हेरी क्षेत्र तक ओलावृष्टि की खबरें सामने आईं. पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम में अचानक तेज बदलाव देखने को मिला. मौसम विभाग के पूर्वानुमान के विपरीत हुई इस बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की परेशानी और बढ़ा दी है. खेतों में खड़ी और कटी हुई गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है. बारिश के चलते अधिकतम और न्यूनतम तापमान में 1 से 2 डिग्री की गिरावट होने की संभावना है. मौसम विभाग के अनुसार यह स्थिति 5 अप्रैल तक बनी रह सकती है. 

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बड़वानी: बे-मौसम बारिश से बढ़ी किसानों की चिंता

बड़वानी शहर में भी बे-मौसम बारिश हुई. जिसने खेतों में खड़ी फसलों पर संकट खड़ा कर दिया है. एक ओर आम नागरिकों को तपती गर्मी से राहत मिली, तो दूसरी ओर किसान अपनी मेहनत पर पानी फिरने की आशंका से परेशान हैं. खेतों में तैयार खड़ी गेहूं की कुछ किसानों की फसल पर बारिश का सीधा असर पड़ सकता है. फसल की गुणवत्ता खराब होने और उत्पादन घटने का खतरा मंडरा रहा है वहीं डालर चना और मक्का जैसी फसलें भी इस बेमौसम बारिश से सुरक्षित नहीं हैं. नमी बढ़ने से गेहूं और डालर चने के दाने खराब होने और फसल के सड़ने की संभावना बनी हुई है.