Delhi-Mumbai Link Bridge: राष्ट्रय चम्बल घडियाल अभ्यारण्य के राजघाट पर दिल्ली से मुंबई को जोड़ने वाले नए ब्रिज की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है. आधुनिक मशीनों से रेत की खुदाई करते-करते खनन माफिया ब्रिज के नजदीक तक पहुंच गए हैं, जिसके ऊपर से रोजाना 24 घंटे निरंतर गुजरने वाले भारी वाहन, सवारी वाहन, दुपहिया वाहन हजारों की संख्या में निकलते हैं.
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नर्मदा नदी के नए और पुराने दोनों पुल के नीचे बने हजारों की संख्या में गड्ढे
रिपोर्ट के मुताबिक नर्मदा नदी के नए और पुराने दोनों पुल के नीचे और दांए-बांए नदी की तलहटी पर हजारों की संख्या में रेत माफियाओं द्वारा निर्मित किए गए छोटे-छोटे गड्डे भयावह कल तस्वीर उकेर रहे हैं. दोनों नए पुल के नजदीक खनन होने की जानकारी उच्चतम न्यायालय द्वारा संज्ञान में लिया जा चुका है, लेकिन अभी रेत खनन माफियाओ के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हो सकी है.
पिलर के नजदीक किए खनन से ब्रिज की सुरक्षा पर लगे सवालिया निशान
गौरतलब है चम्बल नदी के नए और पुराने पुल से राजघाट पर पहुंचने के बाद पिलर के नजदीक किए गए खनन से पुल की सुरक्षा पर सवालिया निशान लग रहा है. पुराने पुल के 13 पिलर को सुरक्षित करने के लिए बनाई गई सेफ्टीवॉल खनन माफियाओं द्वारा पुल के नीचे किए गए खनन के कारण क्षतिग्रस्त हो गई. माना जा रहा है कि दोनों नए पुल के नीचे इसी तरह खनन होता रहा तो संभवत: मध्य प्रदेश क्षेत्र के 14 पिलर क्षतिग्रस्त हो सकते हैं.
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चौकी के सामने से हजारों ट्रॉली को लेकर ट्रैक्टर निकल रहे हैं सैंड माफिया
उल्लेखनीय है चम्बल नदी के राजघाट पर नए व पुराने पुल के नीचे खनन करने वाले माफियाओंं को रोकने के लिए जहां अल्लाबेली की चौकी पर सशस्त्र बल का कैंप स्थापित किया गया है, लेकिन चौकी के सामने से ही 8 अप्रैल से पहले रेत से भरी हजारों ट्रॉली को लेकर ट्रैक्टर निकल रहे थे, वहीं राजघाट के ऊपर एकत्रित रेत लोडर और जेसीबी की सहायता से ट्रक में भरकर अन्य राज्यों में भेजा जा रहा था, जिससे माफिया करोडों रुपए की कमाई रहे थे. इसे रोकने के लिए राजघाट और पिपरई रेत खदान पर ही टेंट में लाइट व हूटर लगाकर सशस्त्र बल 24 घंटे तैनात कर दिया है.
नए ब्रिज की जांच और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने पहुंचेगी पुलिस टीम
पुलिस बल रेत खनन रोकने का दावा बंदूक की दम पर कर रहा है. जबकि वन और पुलिस के अधिकारी नए पुल के नीचे खनन होने से पिलर नुकसान होने को गलत बता रहे हैं. हालांकि उच्चतम न्यायालय की कड़ी टिप्पणी के बाद वन विभाग व राष्ट्रीय राजमार्ग का तकनीकी दल शीघ्र ही पुल के पिलर की जांच और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने पहुंचेगा. यह जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट के दो सदस्यीय पीठ के समक्ष 17 अप्रैल को प्रस्तुत की जायेगी,
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