Madha Pradesh Neemuch Baan Darshan 2026: मध्य प्रदेश के नीमच जिले की रामपुरा तहसील के हतुनिया गांव में शुक्रवार को करीब 300 साल पुरानी “बाण दर्शन” परंपरा पूरे विधि-विधान के साथ आयोजित की गई. यह दुर्लभ आयोजन 20 साल बाद हुआ, जिसे देखने के लिए हजारों श्रद्धालु गांव पहुंचे. पूरे दिन गांव में आस्था और उत्साह का माहौल बना रहा.
सुबह से शुरू हुआ धार्मिक अनुष्ठान
“बाण दर्शन” में सुबह 7 बजे पूजा-अर्चना, आरती और हवन-यज्ञ के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई. इसके बाद परंपरा के अनुसार पुराने बाण को ज्वार के ढेर में स्थापित किया गया. अनुष्ठान के दौरान मामा-भांजे की तीन जोड़ियों को बारी-बारी से खड़ा किया गया और डोरियों के माध्यम से परंपरागत प्रक्रिया पूरी की गई.
डोरियां अपने आप उठीं, लेकिन अधूरी रही प्रक्रिया
आयोजन के दौरान एक चौंकाने वाला दृश्य सामने आया. डोरियां बिना किसी सहारे के लगभग 2 फीट तक अपने आप ऊपर उठ गईं. यह देखकर श्रद्धालु रोमांचित हो गए. हालांकि परंपरा के अनुसार डोरियों का बाण तक जाकर टिकना इस बार नहीं हो सका. तीनों जोड़ियों ने प्रयास किया, लेकिन प्रक्रिया अधूरी रह गई, जिससे कुछ लोगों में हल्की निराशा भी देखी गई.
LED स्क्रीन और यूट्यूब पर लाइव दर्शन
भारी भीड़ को देखते हुए गांव में कई स्थानों पर पंडाल लगाए गए और करीब 35 एलईडी स्क्रीन लगाई गईं, जिन पर श्रद्धालुओं ने लाइव दर्शन किए.
कार्यक्रम का यूट्यूब पर भी सीधा प्रसारण किया गया, जिससे दूर-दराज के लोग भी इस आयोजन से जुड़ सके.
Madha Pradesh Neemuch Baan Darshan 2026
लक्ष्मण जी की प्रतिमा पर दिखीं पसीने की बूंदें
इस आयोजन में एक और खास घटना सामने आई. लक्ष्मण जी की प्रतिमा पर पसीने की बूंदें दिखाई दीं, जिसे ग्रामीणों ने दिव्य संकेत के रूप में देखा. यह दृश्य श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना रहा.
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
आयोजन के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए. बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे. कार्यक्रम के समापन पर महाप्रसादी का वितरण किया गया.
Madha Pradesh Neemuch Baan Darshan 2026
अब सीधे 2068 में होगा अगला ‘बाण दर्शन'
गौरतलब है कि यह परंपरा केवल उसी वर्ष आयोजित होती है जब रामनवमी शुक्रवार को पड़ती है. अब अगला “बाण दर्शन” सीधे साल 2068 में होगा, यानी श्रद्धालुओं को इस अनोखी परंपरा के लिए 42 साल का लंबा इंतजार करना पड़ेगा.