मध्य प्रदेश में सरकारी 'बाबुओं' की भारी कमी, सिर्फ 3 महीने में 28000 हजार कर्मचारी हुए रिटायर

Government Employees Shortage in Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश के सरकारी दफ्तरों में काम प्रभावित होने की आशंका दिख रही है, क्योंकि साल की शुरुआती तीन महीनों में 28 हजार से ज्यादा सरकारी कर्मी रिटायर हो चुके हैं और भर्तियों को लेकर कोई बातचीत नहीं हो रही है.

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Madhya Pradesh Govt Employees: मध्य प्रदेश के सरकारी दफ्तर इन दिनों कर्मचारी अधिकारियों की कमी से जूझ रहे हैं. मध्य प्रदेश में 2026 की पहली तिमाही जनवरी, फरवरी और मार्च के तीन महीनों में ही करीब 28 हजार सरकारी अधिकारी और कर्मचारी रिटायर हुए हैं. सरकार के कामकाज का जिम्मा जिन कंधो पर हैं, उनकी संख्या लगातार कम हो रही है. रोजाना नई-नई सरकारी योजनाएं बन रही हैं, लेकिन क्रियान्वयन के लिए वो अनुभवी कर्मचारियों अधिकारियों की संख्या लगातार घट रही है.

हालात ये हैं कि प्रदेश में कर्मचारियों का संकट लाखों में पहुंच चुका है. सरकार कछुआ चाल से खानापूर्ति कर रही है. कर्मचारी संगठन प्रदेश में भर्ती के लिए अभियान चलाने की बात कर रहे हैं, क्योंकि बोझ कर्मचारियों पर ज्यादा है.

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एक साथ अनुभवी लोगों का बाहर होना खतरनाक

डायरेक्टोरेट ऑफ स्टेटिस्टिक्स एंड इकोनॉमिक्स के आंकड़े बताते हैं कि ये कोई छोटा-मोटा बदलाव नहीं है. एक साथ इतने बड़े पैमाने पर अनुभवी लोगों का सिस्टम से बाहर जाना सरकारी तंत्र की कार्यक्षमता पर सीधा दबाव डाल सकता है. पिछले साल यानी 2025 में कुल 32 हजार 500 कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए थे. इस साल 2026 की पहली तिमाही में ही 28 हजार कर्मचारी रिटायर्ड हो गए हैं. आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं.

काम की गुणवत्ता में आएगी कमी

सरकार को तत्काल समाधान के रूप में संविदा कर्मचारियों या आउटसोर्सिंग पर निर्भर रहना पड़ सकता है. इससे जवाबदेही और गुणवत्ता पर सवाल उठने स्वाभाविक हैं. उधर, संविदा कर्मचारी भी मौका देख नियमितीकरण की मांग को लेकर आवाज बुलंद कर रहे हैं.

सरकार आंकड़े देखें तो स्कूल शिक्षा विभाग में 9 हजार 7 सौ 50 कर्मचारी रिटायर हुए, जो सबसे ज्यादा है.

  • स्वास्थ्य विभाग- 6050
  • गृह, पुलिस विभाग- 4600
  • राजस्व विभाग- 2700 कर्मचारी
  • लोक निर्माण विभाग- 2100 कर्मचारी
  • नगरीय प्रशासन- 1450 कर्मचारी, अधिकारी
  • ऊर्जा विभाग- 1200 कर्मचारी विभाग
  • अन्य विभागों- 4200 कर्मचारी रिटायर हुए
  • कुल- लगभग 28000 

उधर, सरकार का तर्क है कि वह तेजी से भर्ती प्रकिया पर फोकस करने की बात कह रही है. नेता मानते हैं कि जो कमी है उसे दूर किया जा रहा है. इसकी जड़ें 1980-90 के दशक में हैं. उस समय मध्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर सरकारी भर्तियां हुई थीं. वह पूरी पीढ़ी अब एक साथ रिटायरमेंट की उम्र में पहुंच रही है. लिहाजा प्रदेशों में हालात खराब हो रहे हैं.

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