मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को राज्य सरकार को भोपाल में बंद पड़ी यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के अंदर और आसपास दूषित मिट्टी और भूजल के आकलन व उपचार योजना पेश करने के लिए पांच सप्ताह का समय दिया.
1984 में 2-3 दिसंबर की दरम्यानी रात, भोपाल की यूनियन कार्बाइड की कीटनाशक फैक्ट्री से अत्यंत जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) गैस का रिसाव हुआ था. इस हादसे में कम से कम 5,479 लोगों की मौत हुई और हजारों लोग स्थायी रूप से अपंग हो गए थे.
न्यायमूर्ति वी. के. सिंह और न्यायमूर्ति ए. के. निरंकारी की खंडपीठ ने राज्य सरकार द्वारा दायर हलफनामे को रिकॉर्ड में लिया, जिसमें योजना पेश करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया था.
सुनवाई उन याचिकाओं पर हो रही है जिनका उद्देश्य क्षेत्र को प्रदूषण मुक्त बनाना है. इस दौरान शामिल गैर-सरकारी संगठन ‘भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन' की रचना ढींगरा ने बताया कि सरकार को शुक्रवार को योजना प्रस्तुत करनी थी, लेकिन वह ऐसा नहीं कर सकी और समयसीमा बढ़ाने का अनुरोध किया.