दुल्हन बनी 'झांसी की रानी'- VIDEO; एमपी में निकली अनोखी बारात, सोशल मीडिया पर वायरल

मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले से एक अनोखी बारात का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस बारात में दुल्हन नेहा तायडे झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के अंदाज में घोड़े पर सवार होकर तलवार हाथ में लिए निकलीं. यह दृश्य नारी सशक्तिकरण और बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान का जीवंत संदेश बन गया.

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Jhansi Rani Bride Viral Video: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले से एक ऐसी अनोखी बारात निकली जिसे देखने वाला हर कोई दंग रह गया. इस बारात में घोड़े पर दुल्हा नहीं, बल्कि दुल्हन सवार थी. दुल्हन भी साधारण रूप में नहीं, बल्कि झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के अंदाज में हाथ में तलवार और चेहरे पर उत्साह लिए बारात में शामिल हुई. इस नजारे को जिसने भी देखा, वह हैरान हो गया. लोगों ने इसे अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर सोशल मीडिया पर साझा किया और देखते ही देखते यह वीडियो वायरल हो गया.

कौन है घोड़े पर सवार दुल्हन?

यह अनोखी दुल्हन खामनी गांव की रहने वाली नेहा तायडे हैं. उनकी दिवंगत मां की इच्छा थी कि बेटी की बारात रानी लक्ष्मीबाई के रूप में निकले. इस इच्छा को पूरा करने के लिए पिता सोमेश तायडे ने नेहा को झांसी की रानी के रूप में तैयार किया और घोड़े पर सवार कर बारात निकाली. बेटी की यह खुशी देखकर पिता भी भावुक हो गए.

लोगों की प्रतिक्रिया

जब नेहा तायडे तलवार हाथ में लिए और साफा बांधकर झांसी की रानी के रूप में गांव में निकलीं, तो हर कोई उनकी तारीफ करने लगा. किसी ने उन्हें "पापा की परी" कहा तो किसी ने इसे "नारी सशक्तिकरण की मिसाल" बताया. यह दृश्य गांव के लोगों के लिए यादगार बन गया.

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परिवार की कहानी

जानकारी के अनुसार, नेहा तायडे के पिता सोमेश तायडे की दो बेटियां और एक बेटा है. कुछ वर्ष पहले उनकी पत्नी का निधन हो गया था. पत्नी की इच्छा थी कि बेटियों को भी बेटों जैसा दर्जा दिया जाए और समाज में भेदभाव खत्म हो. पत्नी के निधन के बाद सोमेश ने तीनों बच्चों की समान रूप से परवरिश की. बड़ी बेटी को स्नातक तक पढ़ाया और छोटी बेटी नेहा को फैशन डिजाइनर बनाकर महाराष्ट्र में शादी की.

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बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश

नेहा की बारात को झांसी की रानी के रूप में निकालकर पिता सोमेश तायडे ने न केवल अपनी पत्नी की इच्छा पूरी की, बल्कि समाज को भी एक मजबूत संदेश दिया. उन्होंने साबित किया कि बेटियां किसी भी मामले में बेटों से कम नहीं हैं. यह बारात "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" अभियान की सार्थकता को दर्शाती है और नारी सशक्तिकरण की एक जीवंत मिसाल बन गई है.

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