Iran- Israel and US war Effect in Bhopal: ईरान- अमेरिका और इजरायल के बीच जारी युद्ध का असर अब हजारों किलोमीटर दूर भारत के औद्योगिक शहरों में भी साफ दिखाई देने लगा है. इसी कड़ी में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के औद्योगिक क्षेत्रों में कच्चे माल की भारी कमी और कीमतों में बढ़ोतरी ने उद्योगों की कमर तोड़ दी है. हालात ऐसे बन गए हैं कि कई फैक्ट्रियां नए ऑर्डर लेने से पीछे हट रही हैं और सिर्फ पुराने ऑर्डर पूरे करने पर ही ध्यान दे रही हैं.
दरअसल, युद्ध की वजह से सप्लाई चेन बाधित होने से उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख कच्चे माल के दाम तेजी से बढ़े हैं. लोहा करीब 20% महंगा हो गया है, एलुमिनियम की कीमत तकरीबन 22% तक बढ़ गई है, पेंट की कीमतों में भी 25% की वृद्धि हुई है, जबकि ट्रांसफॉर्मर ऑयल के दाम 100% से भी ज्यादा बढ़ चुके हैं. इस बढ़ती लागत ने उत्पादन को महंगा और मुश्किल बना दिया है.
गोविंदपुरा, मंडीदीप और बगरोदा में हालात सबसे खराब
भोपाल के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र—गोविंदपुरा, मंडीदीप और बगरोदा—सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. यहां कच्चे माल और कमर्शियल गैस की कमी ने उत्पादन, निर्यात और रोजगार तीनों पर एक साथ दबाव डाल दिया है. मंडीदीप औद्योगिक क्षेत्र में उत्पादन करीब 30% तक घट चुका है. प्लास्टिक, पैकेजिंग, फार्मा और इंजीनियरिंग सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. पेट्रोकेमिकल्स की सप्लाई रुकने से प्लास्टिक उद्योग में कच्चे माल की कीमतें लगभग 20% तक बढ़ गई हैं, जबकि फार्मा कंपनियां 1015% महंगे कच्चे माल और पैकेजिंग से जूझ रही हैं.
फैक्ट्रियों में उत्पादन घटा, शिफ्ट और ओवरटाइम बंद
औद्योगिक क्षेत्रों में स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है. गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया में 1157 यूनिट्स में से करीब 25 यूनिट्स पूरी तरह बंद हो चुकी हैं, जबकि 600 यूनिट्स आधी क्षमता पर काम कर रही हैं. लगभग 500 फैक्ट्रियों ने अपनी शिफ्ट कम कर दी है. जो फैक्ट्रियां पहले रात 9:30 बजे तक चलती थीं, वे अब शाम 5:30 बजे ही बंद हो रही हैं. ओवरटाइम पूरी तरह बंद कर दिया गया है, जिससे मजदूरों की आमदनी पर सीधा असर पड़ा है.
निर्यात और व्यापार पर भी असर
ट्रेड रूट प्रभावित होने के कारण निर्यात में भी भारी गिरावट आई है. मंडीदीप से पहले जहां हर महीने औसतन 3500 कंटेनर भेजे जाते थे, अब यह संख्या घटकर लगभग 1500 रह गई है. चावल, कॉटन और फैब्रिक का निर्यात लगभग आधा हो गया है. उद्योगों के अनुसार, इस संकट के चलते करीब 2500 करोड़ रुपये के निर्यात पर असर पड़ा है. उत्पादन भी अब 70% के आसपास ही सिमट गया है.
कमर्शियल गैस की किल्लत से बढ़ी परेशानी
उद्योगों के लिए कमर्शियल एलपीजी गैस की कमी एक बड़ी चुनौती बन गई है. गोविंदपुरा क्षेत्र में रोजाना 1800 से 2000 सिलेंडर की जरूरत होती है, लेकिन सप्लाई बाधित है. ऐसे में कई उद्योगों को मजबूरी में महंगे दामों पर ब्लैक में गैस खरीदनी पड़ रही है. फेब्रिकेशन और इंजीनियरिंग यूनिट्स में गैस के बिना उत्पादन पूरी तरह ठप हो जाता है, जिससे कामकाज और ज्यादा प्रभावित हो रहा है.
मजदूरों पर गहराया आर्थिक संकट
इस औद्योगिक संकट का सबसे ज्यादा असर मजदूरों पर पड़ा है. करीब 20 हजार से ज्यादा मजदूरों के परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं. काम के घंटे कम होने और ओवरटाइम बंद होने से उनकी आय आधी रह गई है. कई मजदूरों को डर है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो उन्हें नौकरी तक गंवानी पड़ सकती है. पहले ही हजारों कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो चुका है.
बदतर होते जा रहे हैं हालात
यहां तक कि कोरोना महामारी के दौरान भी हालात इतने खराब नहीं थे. आज स्थिति यह है कि कई फैक्ट्रियों में मशीनें कच्चे माल के अभाव में खाली पड़ी हैं और प्रबंधन के सामने उत्पादन जारी रखना बड़ी चुनौती बन गया है.
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ईरान-इजरायल युद्ध ने यह साफ कर दिया है कि वैश्विक संघर्षों का असर सीमाओं से परे जाकर आम लोगों की रोजी रोटी तक पहुंचता है. भोपाल के औद्योगिक क्षेत्रों में घटता उत्पादन, बढ़ती लागत और रोजगार का संकट इस बात का उदाहरण है कि अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता किस तरह स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है. अगर जल्द ही सप्लाई चेन और व्यापारिक रास्तों में सुधार नहीं हुआ, तो यह संकट और गहरा सकता है, जिससे हजारों परिवारों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा.
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