मीठा खाने से रोका तो ट्रेन के आगे लेटा 79 वर्षीय बुजुर्ग, फ‍िर चली गई जान या कोई आया मसीहा बनकर? 

इंदौर रेलवे स्टेशन पर 79 वर्षीय बुजुर्ग ने अवंतिका एक्सप्रेस के सामने लेटकर सुसाइड की कोशिश की, लेकिन जीआरपी आरक्षक की तत्परता से उनकी जान बच गई. घटना पारिवारिक तनाव से जुड़ी बताई जा रही है.

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मध्‍य प्रदेश के इंदौर रेलवे स्टेशन पर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर 79 साल के बुजुर्ग ने चलती ट्रेन के सामने ट्रैक पर लेटकर जान देने की कोशिश की. समय रहते सतर्कता और बहादुरी ने एक बड़ा हादसा टाल दिया.

बताया गया कि बुजुर्ग अवंतिका एक्सप्रेस के सामने लेट गए थे. ट्रेन प्लेटफॉर्म पर खड़ी थी और कुछ ही पलों में रवाना होने वाली थी. इसी बीच मौके पर मौजूद जीआरपी के आरक्षक चेतन नरवले की नजर उन पर पड़ी.

परिवार की रोक-टोक से आहत थे बुजुर्ग

मूल रूप से सागर जिले के रहने वाले 79 वर्षीय शिखर चंद्र जैन इन दिनों इंदौर के बड़ा गणपति क्षेत्र में अपने पोते रत्नेश के साथ रह रहे थे. वे डायबिटीज से पीड़ित हैं. घर में स्वास्थ्य कारणों से उन्हें मीठा खाने से मना किया गया था. परिजनों की इसी रोक-टोक से वे भावनात्मक रूप से आहत हो गए और तनाव में आकर स्टेशन पहुंच गए.

आरक्षक ने दिखाई बहादुरी

जैसे ही ट्रेन के आगे बुजुर्ग को लेटा देखा, आरक्षक चेतन नरवले ने बिना एक पल गंवाए ट्रैक पर छलांग लगा दी. उन्होंने पहले लोको पायलट को ब्रेक लगाने का इशारा किया और फिर ट्रेन आने से ठीक पहले बुजुर्ग को ट्रैक से खींचकर बाहर निकाल लिया. उनकी सूझबूझ से एक बड़ी अनहोनी टल गई.

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डायरी से मिला पोते का नंबर

घटना के बाद जीआरपी जवानों ने बुजुर्ग को समझाइश दी. वे काफी व्यथित थे. उनके पास मौजूद डायरी से पोते रत्नेश का मोबाइल नंबर मिला. सूचना मिलते ही पोता स्टेशन पहुंचा और दादा को गले लगाकर भावुक हो उठा. जीआरपी की तत्परता और संवेदनशीलता से यह घटना एक सुखद अंत तक पहुंची और बुजुर्ग सुरक्षित घर लौट गए.