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This Article is From Feb 28, 2026

'आपके तार आतंकवाद से जुड़े हैं...', ये कहकर ठगों ने दंपति से ठगे ₹1.15 करोड़, 15 दिन तक किया डिजिटल अरेस्ट 

इंदौर में साइबर ठगों ने बुजुर्ग दंपति को वीडियो कॉल पर “डिजिटल अरेस्ट” में रखकर 1.15 करोड़ रुपये ठग लिए. आरोपियों ने खुद को एटीएस अधिकारी बताकर आतंकवाद से जुड़े फर्जी आरोप लगाए और 15 दिनों तक मानसिक दबाव में रखकर करोड़ों रुपये ट्रांसफर कराए.

'आपके तार आतंकवाद से जुड़े हैं...', ये कहकर ठगों ने दंपति से ठगे ₹1.15 करोड़, 15 दिन तक किया डिजिटल अरेस्ट 

Digital Arrest Scam: ‘आपके तार आतंकवाद से जुड़े हैं…' यही कहकर साइबर ठगों ने इंदौर के एक बुजुर्ग दंपति को 15 दिनों तक वीडियो कॉल पर “डिजिटल अरेस्ट” में रखा और 1.15 करोड़ रुपये हड़प लिए. ठग खुद को एटीएस अधिकारी बताते रहे, गिरफ्तारी और संपत्ति जब्ती की धमकी देते रहे और डर के माहौल में दंपति से करोड़ों रुपये “सुरक्षित जांच” के नाम पर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करा लिए. मामला अब पुलिस तक पहुंच चुका है और एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू हो गई है.

एटीएस अधिकारी बनकर धमकाया

इंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र में रहने वाले 80 वर्षीय विजय सक्सेना और उनकी पत्नी सुमन सक्सेना (77) के मोबाइल पर 15 नवंबर 2025 को एक वीडियो कॉल आया. कॉल करने वाला खुद को पुणे एटीएस मुख्यालय का अधिकारी ‘चंद्रभान सिंह' बताता रहा. उसने दावा किया कि सुमन के नाम से जम्मू स्थित एचडीएफसी बैंक खाते में 70 लाख रुपये की संदिग्ध ट्रांजैक्शन हुई है और मामला आतंकवाद से जुड़ा है. इसके बाद लगातार वीडियो कॉल करके दोनों को “पूछताछ” के नाम पर घंटों बैठे रहने को मजबूर किया गया.

रोजाना घंटों तक ‘डिजिटल अरेस्ट'

ठगों ने दंपति को धमकाया कि सहयोग नहीं किया तो गिरफ्तारी, संपत्ति जब्ती और बच्चों को नुकसान जैसी कार्रवाई होगी. 15 दिनों तक कभी एक घंटे, तो कभी दो घंटे तक उन्हें वीडियो कॉल पर “बंधक” जैसा बनाए रखा गया. इसी दौरान व्हाट्सऐप पर आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक से जुड़े दस्तावेज मंगवाए गए, ताकि भरोसा बन सके और आगे की ठगी आसान हो.

‘सुरक्षित ट्रांजैक्शन' का दिया झांसा

आरोपियों ने दो अलग-अलग बैंक खातों के नंबर भेजे और कहा कि जांच पूरी होने तक रकम “सुरक्षित” रखने के लिए वहां ट्रांसफर करनी होगी. 20 नवंबर 2025 को सुमन ने अपने खाते से 49.70 लाख और उनके पति ने 65.30 लाख रुपये एनईएफटी से बताए गए खातों में ट्रांसफर कर दिए. बैंक में पूछने पर क्या बताना है? इसके बारे में भी ठगों ने बताया कि कह देना “रकम बेटियों के लिए भेजी जा रही है.”

दबाव में बिगड़ी पति की तबीयत

लगातार फोन कॉल, पूछताछ का नाटक और धमकियों के कारण परिवार पर भारी मानसिक दबाव बना. हालत इतनी बिगड़ी कि पति को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. इसी तनाव के बीच कुछ दिन बाद महिला ने पूरी बात अपने दामाद को बताई, तब जाकर ठगी का पूरा खेल स्पष्ट हुआ.

शिकायत के बाद पुलिस ने शुरू की जांच  

परिजनों की जानकारी में मामला आते ही इसकी शिकायत साइबर क्राइम ब्रांच में की गई. जांच के बाद 27 फरवरी 2026 को हीरानगर थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई. पुलिस अब कॉल डिटेल्स, बैंक खातों और लेन-देन की डिटेल खंगाल रही है, ताकि ठगों तक पहुंचा जा सके.

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