Kuno National Park MP: मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक बेहद सकारात्मक खबर सामने आई है. भारत में जन्मी पहली चीता ‘मुखी' आज 3 साल की हो गई है. एक छोटे से शावक से लेकर आत्मविश्वासी मां बनने तक का उसका सफर, भारत के ‘प्रोजेक्ट चीता' की सफलता का मजबूत प्रतीक बनकर उभरा है.
CM Mohan Yadav ने दी जानकारी
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 29 मार्च 2026 को सोशल मीडिया पर ‘मुखी' की तस्वीरें साझा करते हुए इस खास उपलब्धि की जानकारी दी. उन्होंने इसे मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के वन्यजीव संरक्षण के लिए गर्व का क्षण बताया.
India First Born Cheetah Mukhi at Kuno MP
Project Cheetah MP: ‘प्रोजेक्ट चीता' को मिली नई मजबूती
‘मुखी' का जन्म और उसका सफल पालन-पोषण इस बात का संकेत है कि भारत में चीता पुनर्वास योजना सही दिशा में आगे बढ़ रही है. यह उपलब्धि प्रोजेक्ट चीता को नई ऊर्जा और भरोसा देती है. इस सफलता से मध्य प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को नई पहचान मिल रही है. कूनो नेशनल पार्क अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक सफल संरक्षण मॉडल के रूप में देखा जा रहा है.
India First Born Cheetah Mukhi at Kuno MP
कुनो नेशनल पार्क: लोकेशन, क्षेत्रफल और खास पहचान
- कुनो नेशनल पार्क मध्य प्रदेश के श्योपुर और मुरैना जिलों में स्थित है.
- यह पार्क कुनो नदी के किनारे बसा है, जो इसके पारिस्थितिकी तंत्र की जीवनरेखा है.
- 2018 में इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला.
- कुल क्षेत्रफल लगभग 748 वर्ग किमी (कोर + विस्तार), जबकि मूल कोर एरिया 344.686 वर्ग किमी था.
- यहां के विशाल घास के मैदान (Grasslands) और जंगल इसे कान्हा व बांधवगढ़ से भी अलग और खास बनाते हैं.
प्रोजेक्ट चीता और वन्यजीवों की विविधता
- 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से लाए गए चीतों को कुनो में छोड़ा गया. भारत में 70 साल बाद चीता वापसी.
- ‘प्रोजेक्ट चीता' के कारण यह पार्क दुनिया भर में चर्चा का केंद्र बना.
- कुनो नेशनल पार्क में नीलगाय, सांभर, चीतल, काला हिरण 200 से ज्यादा पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं.
- वनस्पति में प्रमुख: खैर, करधाई और सलाई के पेड़.
- करधाई पेड़ की खासियत है कि वह नमी से ही हरा हो जाता है, जो कुनो की जीवटता का प्रतीक माना जाता है.
कुनो नेशनल पार्क का इतिहास
- कुनो क्षेत्र प्राचीन समय से घने जंगल और समृद्ध वन्यजीवों के लिए प्रसिद्ध रहा है.
- मुगल काल में अकबर के समय यहां हाथियों और शेरों का जिक्र मिलता है.
- 1904 में माधवराव सिंधिया और लॉर्ड कर्जन ने यहां शेर बसाने की कोशिश की.
- अफ्रीका से शेर लाकर बसाने का प्रयास किया गया, लेकिन 1910-12 के बीच प्रोजेक्ट असफल रहा.
- बाद में एशियाई शेरों के पुनर्वास की योजना के चलते इस क्षेत्र को नेशनल पार्क में अपग्रेड किया गया.
- आज कुनो, शेरों के प्रयासों से आगे बढ़कर भारत का एकमात्र चीता संरक्षण केंद्र बन चुका है.