भारत में एक बार फिर से चीतों बसाने के लिए चीता प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है. नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से लाए गए चीतों की पहले मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) में देखभाल की जाती है, फिर इन्हें खुले जंगल में छोड़ दिया है. यहां चीतों का कुनबा तो लगातार बढ़ रहा है, लेकिन यहां से एक बुरी खबर भी सामने आई. कूनो के पालपुर पशु अस्पताल में भर्ती मादा चीता KGP11 ने शनिवार को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, लेकिन रविवार यानी आज उसका पोस्टमॉर्टम किया जाएगा. इससे चीता की मौत का सही कारण पता चल सकेगा.
दरअसल, भारत में पैदा हुई 27 महीनों की मादा चीता KGP11 को कूनो के खुले जंगल में कुछ समय पहले ही छोड़ा गया था, जो कूनो के जंगल की सीमा लांघते हुए मुरैना जिले की सीमा में पहुंच गई थी. फिर ट्रैकिंग टीम को 1 जून के दिन यह मादा चीता मुरैना जिले के पहाड़गड़ इलाके में घायल अवस्था में मिली थी.
एक महीने में 4 शावकों की भी गई जान
उसे तुरंत इलाज के लिए अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने उसका इलाज शुरू किया और डॉक्टर की टीम लगातार उसके स्वास्थ्य पर नजर रखे हुए थी. उसकी तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ और शनिवार की शाम को KGP11 की मौत हो गई. पिछले एक महीने में कूनो नेशनल पार्क के चार नन्हे शावकों और मादा चीता KGP 11 की मौत हो चुकी है. दूसरी ओर मादा चीता का कूनो की सीमा से बाहर जाना, फिर घायल अवस्था मिलना, यह भी एक चीतों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े करता है.
फिलहाल भारत में 52 चीते
फिलहाल कूनो में अब 49 चीते हैं, जिनमें 32 भारत में पैदा हुए चीते शामिल हैं. इनमें से 19 चीते अभी जंगल में आजादी से दौड़ रहे हैं. फिलहाल भारत में चीतों की कुल आबादी अब 52 है, जिसमें कूनो में 49 चीते और गांधी सागर अभयारण्य के 3 चीते शामिल हैं.
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