Fake SIM Cards: भोपाल साइबर क्राइम ब्रांच ने फर्जी सिम कार्ड के बड़े रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए ऐसे आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने एक ही व्यक्ति के दस्तावेज और चेहरे का इस्तेमाल कर 250 सिम कार्ड एक्टिव कराए और उन्हें बेचा. जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने ग्राहकों के पहचान पत्रों की फोटो कॉपी का दुरुपयोग कर अलग‑अलग नाम और पतों पर सिम जारी करवाईं. पुलिस का कहना है कि फर्जी तरीके से जारी इन सिम कार्डों का इस्तेमाल सायबर अपराधों में किया जा रहा था. इस मामले में आगे भी जांच जारी है. पढ़िए भोपाल से हरप्रीत कौर की रिपोर्ट.
एक ही चेहरे पर 246 फर्जी सिम एक्टिव
साइबर क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया गया है कि आरोपियों ने अपने पीओएस (POS) मशीन के जरिए एक ही व्यक्ति के चेहरे की बायोमेट्रिक पहचान का उपयोग कर 246 फर्जी सिम कार्ड एक्टिव किए. इन सिम कार्डों को अलग‑अलग नाम और पते पर दर्ज कर बाजार में बेचा गया. पुलिस के अनुसार यह पूरी प्रक्रिया सुनियोजित तरीके से की गई थी.
Fake Sim Card: एक ही दस्तावेज से 250 सिम एक्टिव करने का खुलासा
ग्राहक के आईडी प्रूफ का किया दुरुपयोग
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने सिम लेने आए वास्तविक ग्राहकों के पहचान पत्रों की फोटो कॉपी अपने पास रख ली. बाद में उन्हीं दस्तावेजों का उपयोग कर एक ही व्यक्ति के नाम पर सैकड़ों सिम कार्ड फर्जी तरीके से एक्टिव कर दिए गए. यह फर्जीवाड़ा लंबे समय से चल रहा था.
2 मोबाइल जब्त
गिरफ्तारी के दौरान साइबर क्राइम ब्रांच ने आरोपियों के कब्जे से 2 मोबाइल फोन और 2 लापु सिम कार्ड भी जब्त किए हैं. पुलिस का मानना है कि इन उपकरणों का उपयोग सिम एक्टिवेशन और सायबर अपराधों से जुड़े नेटवर्क में किया जा रहा था. मामले में आरोपियों के अन्य साथियों की तलाश भी की जा रही है.
फर्जी सिम से सायबर अपराध, पुलिस को मिले अहम सबूत
पुलिस को जांच के दौरान ऐसे पुख्ता सबूत मिले हैं, जिनसे यह साफ हुआ है कि फर्जी तरीके से जारी सिम कार्डों का इस्तेमाल सायबर फ्रॉड और अन्य आपराधिक गतिविधियों में किया गया. इसी आधार पर विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर कार्रवाई की गई है.
सिम विक्रेताओं को सख्त निर्देश
पुलिस ने सभी सिम विक्रेताओं और डिस्ट्रीब्यूटर्स को सख्त हिदायत दी है कि वे किसी भी हाल में फर्जी तरीके से सिम की बिक्री न करें. हर रिटेलर को यह रिकॉर्ड रखना अनिवार्य किया गया है कि कौन‑सी सिम, किस ग्राहक को, किस तारीख को और किस पते पर दी गई है. यदि कोई रिटेलर जानकारी देने में लापरवाही करता पाया गया तो उसके खिलाफ सीधे कार्रवाई की जाएगी.
रिटेलर्स से शपथ पत्र लेने के निर्देश
पुलिस अधीक्षक झाबुआ पद्मविलोचन शुक्ल ने जिले के सभी सिम कंपनियों के वितरकों और रिटेलर्स को निर्देश दिए हैं कि वे अपने‑अपने रिटेलर्स से फर्जी सिम न बेचने को लेकर शपथ पत्र लें. यदि किसी व्यक्ति के पास फर्जी सिम पाई जाती है तो उसे जारी करने वाले रिटेलर पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
Telecom Act 2023 में सख्त सजा का प्रावधान
Telecom Act 2023 के तहत फर्जी सिम कार्ड बेचने, खरीदने या उपयोग करने पर सख्त कानून लागू है. एक पहचान पत्र पर 9 से ज्यादा सिम पाए जाने पर 50 हजार रुपये का जुर्माना और दोबारा ऐसा करने पर 2 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. इसके अलावा फर्जी सिम से जुड़े अपराध में 3 साल तक की जेल या 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है.
आपके नाम पर फर्जी सिम तो नहीं? ऐसे करें जांच
अगर आपके नाम से कोई फर्जी सिम जारी है या नहीं, इसकी जांच आप https://sancharsaathi.gov.in/ पोर्टल के जरिए कर सकते हैं. TAFCOP मॉड्यूल के माध्यम से आप अपने नाम पर जारी सभी मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी ले सकते हैं और संदिग्ध नंबरों को ब्लॉक भी कर सकते हैं.
कैसे ब्लॉक करें फर्जी सिम
- sancharsaathi.gov.in पोर्टल पर जाएं
- “Know Your Mobile Connections” पर क्लिक करें
- 10 अंकों का मोबाइल नंबर दर्ज करें
- कैप्चा और ओटीपी डालें
- संदिग्ध नंबर दिखने पर तुरंत ब्लॉक करें
पुलिस का कहना है कि फर्जी सिम के जरिए सायबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, ऐसे में आम लोगों और सिम विक्रेताओं दोनों को सतर्क रहने की जरूरत है.
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