Dhan Kharidi Kendra: गलत बैंक स्टेटमेंट पर खरीदी केन्द्र पाने की योजना बना रहे थे लोग, प्रशासन ने कर दी बड़ी कार्रवाई

Satna Police Action: सतना में  एलडीएम ने धान खरीदी केंद्र में बड़ी गड़बड़ी का खुलासा हुआ है. इस जांच में फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है. जानकारी के अनुसार, सात समूहों के बैंक स्टेटमेंट में गड़बड़ी मिली है. आइए आपको पूरे मामले के बारे में बताते हैं.

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सतना में धान खरीदी केंद्र को लेकर सामने आया बड़ा फर्जीवाड़ा

MP Dhan Kharidi Kendra: खरीफ सीजन की फसल, धान (Dhan) का उपार्जन काम पाने के लिए महिला स्वं सहायता समूहों ने मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सतना (Satna) जिले में बड़ा फर्जीवाड़ा किया. जिला प्रशासन ने इस मामले में पोल खोल कर रख दी है. अब इन समूहों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है. सतना-मैहर के करीब सात ऐसे केन्द्र (Dhan Kharidi Kendra Scam Satna) पाए गए हैं, जिसमें बैंक स्टेटमेंट (Fake Bank Statement) में छेड़छाड़ की पुष्टि होने के बाद इन्हें अपात्र घोषित कर दिया गया है. अब इन पर जिला पंचायत सीईओ आवश्यक कार्रवाई करेगी. 

क्या कहता है नियम

उल्लेखनीय है कि सतना और मैहर जिले में 19 नए केन्द्र समूहों को दिए जाने की तैयारी थी. ऐसे में 101 आवेदन जनपद सीईओ के माध्यम से जिला पंचायत की राष्ट्रीय आजीविका मिशन शाखा तक पहुंचे. इस बीच कुछ समूहों ने अपना स्टेटेमेंट जमा किया है, जो संदिग्ध प्रतीत हो रहा था. स्टेटमेंट में जो राशि दर्ज की गई वह खाते में उपलब्ध नहीं थी. यह मामला चर्चा में आ गया. जिसके बाद लीड बैंक मैनेजर से मामले की पुष्टि हेतु कहा गया. इस दौरान करीब नौ समूह ऐसे मिले, जिन्होंने दो लाख रुपये अपने बैंक खाते में फर्जी तरीके से दर्शाए और उसे जमा कर खुद की पात्रता का दावा किया. 

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जिला पंचायत ने जारी की नोटिस

फर्जी रिकार्ड तैयार कर खरीदी केन्द्र लेने की कोशिश में जुटे समूहों को जिला पंचायत सीईओ के द्वारा नोटिस जारी किए गए है. अब इन समूहों का भविष्य क्या होगा? कहना मुश्किल है. विभागीय सूत्रों की मानें, तो इनके खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज हो सकती है. इस मामले की अधिक जानकारी के लिए जिला पंचायत सीईओ संजना जैन से मोबाइल के जरिए संपर्क किया गया तो, उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया.

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गड़बड़ी में कौन जिम्मेदार?

समूहों का फर्जीवाड़ा पकड़ने के बाद उन्हें अपात्र कर दिया गया और अब FIR कराने की तैयारी की जा रही है. ऐसे में एक सवाल यह भी उठता है कि ब्लॉक स्तर पर जिन अधिकारियों ने इन रिकार्डों का सत्यापन कर उच्च कार्यालय को प्रस्तावित किया, उनका भविष्य क्या होगा? क्या उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी जिन्होंने आंख बंद कर फर्जी रिकार्डों का सही बता कर समूह देने की अनुसंशा कर दी.

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