Ganga Jamuni Tehzeeb: मध्य प्रदेश के दमोह जिले के तेंदूखेड़ा से इंसानियत और भाईचारे को मजबूत करने वाली एक प्रेरक कहानी सामने आई है. यहां गांव निबौरा के रहने वाले रामराज यादव ने धर्म और मजहब से ऊपर उठकर ऐसा काम किया, जिसकी हर जगह सराहना हो रही है. रामराज यादव ने एक मुस्लिम बच्ची नजमा को न सिर्फ वर्षों तक अपनी सगी बेटी की तरह पाला, बल्कि जब उसके विवाह का समय आया, तो पूरे सम्मान और जिम्मेदारी के साथ अपनी ही बेटी मानकर उसका विवाह भी करवाया.
कामकाज के कारण बच्ची को सौंपा जिम्मा
रामराज यादव ने बताया कि नजमा के माता‑पिता रोज़गार की तलाश में अक्सर दिल्ली जाया करते थे. ऐसे में वे बच्ची को उनके पास छोड़ जाते थे, ताकि उसकी देखभाल ठीक से हो सके. धीरे‑धीरे नजमा रामराज यादव के परिवार का हिस्सा बन गई. उन्होंने उसे कभी पराया नहीं समझा और अपनी संतान जैसी ममता, सुरक्षा और अपनापन दिया.
पढ़ाई‑लिखाई और परवरिश में नहीं की कोई कमी
रामराज यादव ने नजमा की पढ़ाई‑लिखाई से लेकर रोजमर्रा की सभी जरूरतों का पूरा ध्यान रखा. बेटी स्कूल जाए, अच्छे संस्कार पाए और सुरक्षित रहे उनके लिए यह सबसे बड़ी जिम्मेदारी थी. परिवार ने भी उसे पूरी तरह अपनाया और नजमा ने भी इस घर को अपना ही घर माना.
विवाह का समय आया, तो खुद उठाई पूरी जिम्मेदारी
जब नजमा के विवाह की बात आई, तो रामराज यादव ने बिना किसी भेदभाव के पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली. उन्होंने अपने खर्च से शादी की सभी तैयारियां कीं और परंपराओं के अनुसार कन्यादान भी किया. इस दौरान मुस्लिम धर्म की भावनाओं और रीति‑रिवाजों का पूरा सम्मान रखा गया.
‘मैंने सिर्फ एक बेटी देखी' – रामराज यादव
कन्यादान के बाद रामराज यादव भावुक हो उठे. उन्होंने कहा, “मैंने कभी धर्म नहीं देखा, मैंने सिर्फ एक बेटी देखी. उसका कन्यादान कर मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं.” उनके ये शब्द वहां मौजूद हर व्यक्ति के दिल को छू गए.
समाज के लोगों ने की खुलकर प्रशंसा
तेजगढ़ के पूर्व सरपंच फरमान खान उर्फ गुड्डू भैया ने रामराज यादव की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने जो किया है, वह समाज के लिए एक मजबूत संदेश है. उन्होंने कहा कि ऐसे लोग ही असली भारत की पहचान हैं, जहां इंसानियत सबसे ऊपर होती है.
दूल्हा शाहिद के मित्र शोएब पठान ने भी इस आयोजन को देखकर गर्व व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि पहली बार देखा कि किसी हिंदू परिवार ने अपने खर्च से एक मुस्लिम बेटी का विवाह कराया. उन्होंने माना कि इस तरह की सोच ही समाज को जोड़ती है.
सादगी और सम्मान के साथ विवाह
शादी समारोह सादगीपूर्ण माहौल में हुआ, जहां आपसी सम्मान और विश्वास साफ नजर आया. स्थानीय लोगों और समाजसेवियों ने इस पहल को गंगा‑जमुनी तहज़ीब की जीवंत तस्वीर बताया.
विदाई के समय भावुक हुआ पूरा परिवार
बेटी की विदाई के वक्त माहौल बेहद भावुक हो गया. रामराज यादव और उनके पूरे परिवार की आंखें नम थीं. जिस बेटी को उन्होंने वर्षों तक अपने आंचल में पाला था, उसे विदा करते समय भावनाएं छलक पड़ीं. नजमा भी भर्राई आवाज़ में रामराज यादव की पत्नी से लिपटकर रो पड़ी, जैसे सगे माता‑पिता से विदा ले रही हो.