38 डिग्री की गर्मी में दंडवत आस्था, दमोह के हजारों श्रद्धालु पहुंचे बलखंडन खेर माता धाम

Navratri Jaware Visarjan: दमोह जिले में आस्था की अनूठी मिसाल देखने को मिली, जहां 38 डिग्री की तपिश में हजारों श्रद्धालु दंडवत करते हुए बलखंडन खेर माता धाम पहुंचे.

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38 डिग्री की गर्मी में दंडवत आस्था, दमोह के हजारों श्रद्धालु पहुंचे बलखंडन खेर माता धाम

Balkhandan Kher Mata Dham Damoh: दमोह जिले में आस्था की अनोखी मिसाल देखने को मिली, जहां भीषण गर्मी और तपती जमीन के बावजूद श्रद्धालुओं का विश्वास डगमगाया नहीं. 38 डिग्री तापमान में हजारों श्रद्धालु दंडवत करते हुए प्रसिद्ध बलखंडन खेर माता धाम पहुंचे और पूरा क्षेत्र “जय माता दी” के जयकारों से गूंज उठा. दमोह जिले के तेंदूखेड़ा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत दिनारी के दसोंदी माल गांव में स्थित बलखंडन खेर माता धाम में चैत्र नवरात्रि की नवमी पर आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला. चिलचिलाती धूप और तपती पत्थरीली सड़क पर नंगे पैर खड़ा होना मुश्किल था, इसके बावजूद श्रद्धालु केवल एक तौलिया लपेटे पूरे शरीर को धरती से स्पर्श करते हुए पहाड़ी के पथरीले मार्ग पर दंडवत करते नजर आए.

तपती जमीन, अटूट विश्वास

भर दोपहरी में जब सूर्य आग उगल रहा था, तब भी श्रद्धालुओं के कदम नहीं रुके. कंकड़‑पत्थरों से भरे रास्ते पर हर दंड के साथ उनका विश्वास और आस्था और मजबूत होती गई. चेहरे पर थकान नहीं, बल्कि मां के दर्शन की उत्कंठा साफ झलक रही थी.

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मन्नत पूरी होने पर निभाई जाती है परंपरा

मान्यता है कि जिन भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, वे चैत्र नवरात्रि की नवमी पर दंडवत करते हुए माता के दरबार तक पहुंचते हैं. कई श्रद्धालु नौ दिनों का व्रत रखकर यहीं व्रत खोलते हैं. भक्त गांव से दूर एक स्थान पर एकत्र होकर जयकारों के साथ यात्रा प्रारंभ करते हैं और मां के दरबार तक दंडवत करते हुए पहुंचते हैं.

जवारों का विसर्जन और विशाल मेला; 25 से 30 गांवों से पहुंचे जवारे

इस अवसर पर करीब 25 से 30 गांवों से लाए गए जवारों का विसर्जन किया गया. जवारों के साथ पंडा और श्रद्धालु मीलों दूर से दंडवत करते हुए पहुंचे. देखते ही देखते धार्मिक आयोजन एक विशाल मेले में तब्दील हो गया, जहां हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी.

आस्था का दिव्य संगम

बलखंडन खेर माता धाम में महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे—हर वर्ग के लोग मां की भक्ति में लीन दिखाई दिए. विशेष आकर्षण के रूप में दसोंदा, वीजा डोंगरी और खेड़ा क्षेत्र के जवारे केंद्र में रहे. पहाड़ी पर स्थित बलखंडन माता मंदिर में उमड़ी यह श्रद्धा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बनी, बल्कि विश्वास और परंपरा का जीवंत उदाहरण भी प्रस्तुत करती नजर आई.

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