Chambal Illegal Sand Mining: राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य के राजघाट क्षेत्र में दिल्ली से मुंबई को जोड़ने वाले नए फोरलेन पुल की सुरक्षा गंभीर खतरे में पड़ती नजर आ रही है. अवैध रेत खनन में जुटे माफिया आधुनिक मशीनों के जरिए पुल के बेहद करीब तक पहुंच चुके हैं. जिस पुल से दिन‑रात हजारों भारी और हल्के वाहन गुजरते हैं, उसके पिलरों के पास बड़े‑बड़े गड्ढे इस खतरे को और बढ़ा रहे हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी संज्ञान लेते हुए सख्त रुख अपनाया है.
पुल के नीचे खनन से बढ़ा जोखिम
राजघाट पर बने नए और पुराने दोनों पुलों के नीचे बड़े पैमाने पर रेत खनन किया गया है. नदी की तलहटी में दाएं‑बाएं जगह‑जगह गहरे गड्ढे साफ दिखाई दे रहे हैं. इन गड्ढों ने पुल के पिलरों की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार खनन से पिलरों की नींव कमजोर हो सकती है.
34 पिलरों पर टिका है फोरलेन पुल
यह फोरलेन पुल कुल 34 पिलरों पर खड़ा है. इनमें से मध्यप्रदेश की ओर नए पुलों के 14 पिलर रेत पर बने हुए हैं, जो वर्तमान में पानी के भीतर हैं. वहीं राजस्थान की ओर 6 पिलर सूखी जमीन पर स्थित हैं. सबसे बड़ा खतरा मध्यप्रदेश की तरफ के पिलरों पर मंडरा रहा है, क्योंकि खनन माफिया इन्हीं पिलरों के पास गहराई तक खुदाई कर चुका है.
करोड़ों का अवैध कारोबार
पुराने पुल के 13 पिलरों की सुरक्षा के लिए बनाई गई सेफ्टीवॉल अवैध खनन के कारण पहले ही क्षतिग्रस्त हो चुकी है. यह पुराने पुल की हालत खुद इस बात का संकेत दे रही है कि नए पुल पर भी इसी तरह का खतरा पैदा हो सकता है, अगर खनन पर पूरी तरह रोक नहीं लगी.
8 अप्रैल से पहले तक हालात यह थे कि अल्लाबेली चौकी के सामने से रेत से लदे हजारों ट्रैक्टर लगातार गुजर रहे थे. राजघाट पर इकट्ठा की गई रेत को जेसीबी और लोडर से ट्रकों में भरकर दूसरे राज्यों में भेजा जा रहा था. इस अवैध कारोबार से खनन माफिया करोड़ों रुपये कमा रहा था.
सशस्त्र बलों की तैनाती
अवैध रेत खनन रोकने के लिए अब राजघाट और पिपरई रेत खदान पर सशस्त्र बलों को 24 घंटे तैनात कर दिया गया है. टेंट लगाकर लाइट और हूटर के साथ चौकसी बढ़ाई गई है. पुलिस का दावा है कि सख्ती से निगरानी की जा रही है, हालांकि जमीनी हालात पहले जैसी ही गंभीर बताए जा रहे हैं.
विभागों के दावे और हकीकत
वन विभाग और पुलिस के कुछ अधिकारियों का कहना है कि नए पुल के पिलरों को कोई नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन मौके की स्थिति और पुराने पुल की हालत कुछ और ही कहानी बयां करती है. स्थानीय लोगों में भी इसे लेकर चिंता बनी हुई है.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद अब वन विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की तकनीकी टीम जल्द ही पुल के पिलरों की जांच करेगी. जांच के बाद सुरक्षा व्यवस्था का आकलन कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे 17 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ के सामने पेश किया जाएगा.