Bus operators go on strike in Satna: सतना में लगभग 30 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुए आईएसबीटी से बसों का संचालन नोटिफाइड होने के बाद भी तमाम बस आपरेटर्स विरोध में खड़े हुए हैं. लगातर तीसरे दिन भी पन्ना, नागौद, चित्रकूट, बिरसिंहपुर और सेमरिया रुट के लिए जाने वाली बसों के पहिये थमे रहे जिसका सबसे ज्यादा खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ा. बस यात्रा कर स्कूल,कॉलेज, हॉस्पिटल आने लोगों को अधिक किराया देना पड़ा. यात्रियों की समझ से यह बात परे है कि बस मालिक आखिर विरोध किस बात का कर रहे हैं. क्या उन्हें आईएसबीटी से दिक्कत है या फिर पुराने बस स्टैंड में जमे रहने के पीछे उनका कोई खास मकसद है?
बहरहाल गुरुवार को भी विभिन्न क्षेत्रों की बसों का आवागमन बाधित रहा, जिससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा. किसी को ऑटो का मोटा किराया देने के लिए विवश होना पड़ा तो किसी को अपनी यात्रा रद्द करनी पड़ी. बस ऑपरेटरों ने अपने स्वार्थ में आम जनता को ढाल की तरह इस्तेमाल कर प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन जिला प्रशासन झुकने को तैयार नहीं है.
क्या पहली बार हुई बस अड्डे की शिफ्टिंग
पुराने बस स्टैंड से बसों को हटाकर आईएसबीटी से संचालन के प्रशासनिक फैसले का बस ऑपरेटर विरोध कर रहे हैं. उसके बाद सवाल यह उठता है कि क्या बस स्टैंड की शिफ्टिंग पहली बार की गई. तमाम जिलों में इसी प्रकार से बस स्टैंड दूसरी जगह बनाए गए हैं वहां से भी संचालन किया जा रहा है. आईएसबीटी में मूलभूत सुविधाओं के अभाव के नाम पर दबाव बनाया जा रहा है, जबकि यही हालात पुराने बस स्टैंड में भी हैं. बस ऑपरेटर पुराने बस स्टैंड के कुछ व्यापारियों और अवैध वसूली करने वाली गैंग की कठपुतली बने हुए हैं.शायद विरोध का एक मात्र कारण यही है.
यात्री हुए परेशान
हड़ताल के कारण आईएसबीटी से सतना शहर के बस स्टैंड या अन्य इलाकों तक पहुंचने के लिए यात्रियों को ऑटो और टैक्सी में अतिरिक्त रकम चुकानी पड़ रही है. खासतौर पर ग्रामीण इलाकों से आने वाले यात्रियों, छात्रों, मरीजों और नौकरीपेशा लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. ऑपरेटर पुराने बस स्टैंड से हटने को तैयार नहीं हैं ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इस लड़ाई का अंत कब होगा और राहत कब मिलेगी। फिलहाल, प्रशासन और ऑपरेटरों की खींचतान में आम जनता पिस रही है और हर दिन बढ़ती परेशानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है.