₹2500 प्रति क्विंटल बिका जला गेहूं! आगजनी में खराब हुई फसल, विधायक ने मंडी जाकर दिलवाया सही दाम

हरदा जिले के बड़झिरी गांव में आगजनी से खराब हुई गेहूं की फसल को भी सही दाम मिला. जले हुए गेहूं को पहले मंडी में बेहद कम भाव मिल रहा था, लेकिन टिमरनी विधायक अभिजीत शाह की पहल से फसल 2200 से 2500 रुपये प्रति क्विंटल में बिकी.

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Burnt Wheat Sold at High Price: हरदा जिले के बड़झिरी गांव में आगजनी से तबाह हुए किसानों के लिए एक राहत भरी तस्वीर सामने आई है. आग में जल चुकी फसल, जिसे किसान बेकार मान चुके थे, वही मंडी में अच्छे दाम पर बिकी. यह संभव हुआ टिमरनी विधायक अभिजीत शाह की पहल से, जिन्होंने मौके पर पहुंचकर किसानों का साथ दिया और उन्हें सही मूल्य दिलवाया.

आगजनी में उजड़ गए घर और फसल

दरअसल, बीते दिनों हरदा जिले के ग्राम बड़झिरी में भीषण आगजनी की घटना हुई थी. इस आग में गांव के करीब आठ मकान पूरी तरह जलकर राख हो गए. हादसे की चपेट में किसानों की गेहूं की तैयार फसल भी आ गई, जो घरों में रखी हुई थी और पूरी तरह जल गई.

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मंडी में जली फसल के लगे बेहद कम दाम

आग से प्रभावित किसान अपनी जली हुई गेहूं की फसल लेकर सिराली मंडी पहुंचे. यहां शुरुआत में व्यापारियों ने जल चुके गेहूं के सिर्फ 400 से 500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव लगाए. इससे किसान और मायूस हो गए, क्योंकि पहले ही वे आगजनी से भारी नुकसान झेल चुके थे.

 

विधायक अभिजीत शाह ने मंडी जाकर किसानों को दिलवाया सही दाम. 

₹2200 से ₹2500 प्रति क्विंटल में बिका जला गेहूं

जैसे ही इस स्थिति की जानकारी टिमरनी कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह को मिली, वे बिना देर किए सिराली मंडी पहुंच गए. उन्होंने व्यापारियों से बातचीत की और किसानों की हालत को सामने रखते हुए मानवीय आधार पर उचित दाम देने का आग्रह किया.

विधायक की पहल का असर साफ दिखा. बातचीत के बाद जली हुई गेहूं की एक ट्रॉली 2200 रुपये प्रति क्विंटल और दूसरी ट्रॉली 2500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव में बिकी. यह दाम किसानों की उम्मीद से कहीं बेहतर था.

किसान ने बताया पूरा दर्द

प्रभावित किसान शांतिलाल ने कहा कि हमारे गांव में करीब आठ घरों में आग लगी थी, पूरी फसल जल गई. मंडी में कम भाव मिल रहा था, लेकिन विधायक जी के सहयोग से हमें अच्छा दाम मिल पाया.

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विधायक ने खुद किया सहयोग

विधायक अभिजीत शाह ने बताया कि आगजनी में आठ परिवारों का सब कुछ जल गया था. उन्होंने मंडी में जाकर न सिर्फ बेहतर भाव दिलवाया, बल्कि प्रभावित परिवारों को अपने निजी खर्च से कपड़े, बर्तन और जरूरी घरेलू सामान भी उपलब्ध कराया.