Bhopal Vijay Mewada Murder Case: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में होटल संचालक विजय मेवाड़ा हत्याकांड के मुख्य आरोपी गैंगस्टर आसिफ उर्फ ‘बम' ने पुलिस पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. कम उम्र में अपराध की दुनिया में कदम रखने से लेकर लग्जरी लाइफ जीने तक की उसकी कहानी सामने आई है. आसिफ ने चाकू घोंपकर विजय की हत्या कर दी थी. पुलिस ने शॉर्ट एनकाउंटर के बाद उसे पकड़ लिया था. फिलहाल वह भोपाल के हमीदिया अस्पताल में उपचाररत है. पढ़िए हरप्रीत कौर रीन की रिपोर्ट.
विजय मेवाड़ा हत्याकांड के जांच अधिकारी और भोपाल कमिश्नरेट पुलिस के एसीपी उमेश तिवारी के मुताबिक पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी आसिफ ने कम उम्र में ही अपराध की दुनिया में कदम रख दिया था. पढ़ने-लिखने और कलम उठाने की उम्र में उसने हथियार उठा लिए. इसकी एक बड़ी वजह उसका गैंगस्टर बनने का जुनून था.
कम उम्र में अपराध की दुनिया में एंट्री
पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया है कि आसिफ मध्य प्रदेश के कई कुख्यात गैंगस्टर्स को फॉलो करता था. वह गैंगस्टर स्टाइल में वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर करता था और खुद को डॉन समझने लगा था. लोगों में खौफ पैदा करने के लिए उसने अपने नाम के साथ ‘बम' जोड़ लिया था. बताया जा रहा है कि वह इंदौर के कुख्यात बदमाश सलमान लाला से काफी प्रभावित था और उसी की तरह अपना आपराधिक नेटवर्क खड़ा करना चाहता था.
लग्जरी लाइफ का शौक, अवैध कमाई का खेल
भोपाल पुलिस के अनुसार आरोपी आसिफ लग्जरी लाइफ जीने का आदी था. उसे महंगी बिल्लियां पालने का शौक था. वह महंगी और लग्जरी कार-बाइकों का इस्तेमाल करता था और अक्सर फाइव स्टार होटलों में ठहरता था. कथित तौर पर वह अवैध गतिविधियों के जरिए लाखों रुपये कमाता था. पुलिस अब उसके अपराधों के साथ-साथ उसकी अवैध कमाई और नेटवर्क की भी पूरी जांच कर रही है.
पहले से दर्ज हैं कई मामले
आसिफ पर विजय की हत्या से पहले भी एक हत्या का मामला दर्ज है. वह और उसका बड़ा भाई शरीफ उर्फ बच्चा जुआ, सट्टा और अवैध वसूली जैसे धंधों से जुड़े हुए हैं. उसके खिलाफ शहर के अलग-अलग थानों में एक दर्जन से ज्यादा केस दर्ज हैं. उसका भाई फिलहाल भोपाल सेंट्रल जेल में बंद है.
विवाद के बाद चाकू मारकर की हत्या
विजय मेवाड़ा का अशोक गार्डन इलाके में होटल है. 29 मार्च 2026 की रात होटल के कर्मचारियों और आसिफ के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया था. विजय बीच-बचाव करने पहुंचे तो आसिफ और उसके साथियों ने उन पर चाकू से हमला कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई.
वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए. पुलिस ने दो आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया था, जबकि फरार आसिफ पर 30 हजार रुपये का इनाम घोषित कर उसकी तलाश शुरू कर दी गई थी.
जंगल में घेराबंदी, 10 मिनट चला एनकाउंटर
हत्या के बाद फरार आसिफ की तलाश में भोपाल पुलिस की कई टीमें लगी हुई थीं. 1 अप्रैल 2026 की रात पुलिस को सूचना मिली कि वह रातीबड़ थाना क्षेत्र के समसपुरा जंगल में छिपा हुआ है. तीन सब-इंस्पेक्टर और तीन आरक्षकों की टीम ने जंगल में घेराबंदी की. पुलिस को देखते ही आसिफ भागने लगा और उसने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी. जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोली चलाई.
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करीब 10 मिनट तक चली इस मुठभेड़ में दोनों तरफ से करीब 10 राउंड फायरिंग हुई. इस दौरान आसिफ के दाहिने पैर में गोली लगी और वह घायल होकर गिर पड़ा, जिसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. गुरुवार देर रात मजिस्ट्रेट हमीदिया अस्पताल पहुंचे और इलाज के दौरान ही आरोपी को 13 अप्रैल तक न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए गए.
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