दिल्ली हादसे के बाद भोपाल में खतरे की घंटी; 2 हजार होटल में सिर्फ 40 के पास NOC, बेसमेंट बार सबसे बड़ा खतरा

दिल्ली हादसे के बाद भोपाल में फायर सेफ्टी पर सवाल. 2 हजार होटल में सिर्फ 40 के पास NOC, बेसमेंट बार सबसे बड़ा खतरा.

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भोपाल में फायर सेफ्टी पर बड़ा खतरा: 2 हजार में सिर्फ 40 होटल के पास NOC

Fire Safety Systems Ground Report: दिल्ली होटल अग्निकांड में 21 लोगों की मौत के बाद अब राजधानी भोपाल की फायर सेफ्टी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. शहर में करीब 2 हजार होटल, रेस्टोरेंट और व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं, लेकिन इनमें से केवल लगभग 40 के पास ही फायर सेफ्टी एनओसी है. यह आंकड़ा सुरक्षा व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति को उजागर करता है. खासकर बेसमेंट में चल रहे बार और रेस्टोरेंट सबसे ज्यादा जोखिम भरे माने जा रहे हैं. इसके अलावा प्रदेश में अब तक अलग से फायर सेफ्टी कानून लागू न होना भी चिंता का विषय है. प्रशासन के दावों के बावजूद जमीनी हकीकत कई जगहों पर लापरवाही दर्शाती है.

दिल्ली हादसे ने जगाई चिंता

दिल्ली के हालिया अग्निकांड ने एक बार फिर साबित किया है कि आग की घटनाएं कुछ मिनटों में बड़ी त्रासदी में बदल सकती हैं. ऐसे में भोपाल की तैयारी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठना लाजिमी है, खासकर तब जब हजारों लोग रोजाना इन प्रतिष्ठानों में आते-जाते हैं.

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2 हजार में सिर्फ 40 के पास फायर NOC

नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, भोपाल में लगभग 2 हजार होटल और रेस्टोरेंट संचालित हैं. लेकिन इनमें से सिर्फ करीब 40 प्रतिष्ठानों के पास ही फायर सेफ्टी एनओसी है, जो बेहद चिंता का विषय है. यह दर्शाता है कि अधिकांश जगहों पर आग से बचाव के जरूरी इंतजाम या तो अधूरे हैं या पूरी तरह अनुपस्थित हैं.

हाईराइज बिल्डिंग में भी लापरवाही

हाल ही में रचना टॉवर में लगी आग ने भी सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल खोल दी थी. यहां फायर पाइप की जगह झाड़ू रखे मिले और कई उपकरण बंद पड़े थे, जबकि इस इमारत में मंत्री, विधायक और सांसदों के फ्लैट तक मौजूद हैं. यह स्थिति सिर्फ एक इमारत तक सीमित नहीं है, बल्कि कई अन्य हाईराइज बिल्डिंग में भी ऐसी ही कमियां सामने आई हैं.

बेसमेंट बार बने सबसे बड़ा खतरा

एक्सपर्ट्स के अनुसार सबसे ज्यादा जोखिम उन बार और रेस्टोरेंट में है जो बेसमेंट में संचालित हो रहे हैं. ऐसी जगहों पर आग लगने की स्थिति में धुआं बाहर नहीं निकल पाता, जिससे लोगों के फंसने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.

नियमों की जटिलता भी बनी वजह

फायर एनओसी से जुड़े कड़े नियमों के कारण कई प्रतिष्ठान इसके दायरे से बाहर रह जाते हैं. होटल और रेस्टोरेंट एसोसिएशन जहां नियमों को सरल बनाने की मांग कर रहे हैं, वहीं प्रशासन सुरक्षा मानकों पर समझौता न करने की बात कह रहा है.

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महापौर ने दिए सख्ती के संकेत

भोपाल की महापौर मालती राय ने कहा है कि सार्वजनिक स्थानों पर फायर सेफ्टी अनिवार्य होनी चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि जिन जगहों पर सुरक्षा इंतजाम नहीं होंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह बेसमेंट हो या ऊपरी मंजिल.

फायर ऑडिट के निर्देश

नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पूरे प्रदेश में फायर ऑडिट के निर्देश दिए हैं. मंत्री के अनुसार, होटल, कोचिंग संस्थान और अन्य व्यावसायिक भवनों की जांच की जा रही है और रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी.

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फायर सेफ्टी कानून का अभाव

प्रदेश में अब तक अलग से व्यापक फायर सेफ्टी कानून लागू नहीं हो पाया है. यह एक बड़ा कारण है कि कई जगह नियमों का सख्ती से पालन नहीं हो रहा है और जिम्मेदारी तय करने में भी कठिनाई होती है.

सबसे बड़ा सवाल: कब सुधरेंगे हालात?

हर बड़े हादसे के बाद कार्रवाई और जांच की बात होती है, लेकिन सवाल यह है कि क्या ये कदम जमीन पर उतरते हैं? फायर सेफ्टी जैसी बुनियादी व्यवस्था हादसे के बाद नहीं, बल्कि पहले सुनिश्चित की जानी चाहिए.

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