भोपाल में 30 हजार दुकानों पर सीलिंग की तलवार, सुप्रीम कोर्ट ने हटाई स्टे, सरकार की कमेटी पर भी रोक

भोपाल के रिहायशी इलाकों में चल रहीं 30 हजार से ज्यादा अवैध दुकानों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त हो गया है. कोर्ट ने सरकार की 10 सदस्यीय समिति पर रोक लगाते हुए सभी स्टे ऑर्डर रद्द कर दिए हैं.

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bhopal commercial activities in residential area supreme court strict action.

भोपाल के पॉश इलाकों में घर को दुकान बनाकर व्यापार करने वालों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त हो गया है. बुधवार 5 जुलाई को हुई सुनवाई में कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार की बनाई 10 अफसरों वाली कमेटी को ही रोक लगा दी है. कोर्ट ने कहा- जब मामला हमारे पास चल रहा है तो पैरेलल में कोई और कमेटी बनाकर जांच को डायवर्ट नहीं किया जा सकता.

इतना ही नहीं, जिन दुकानदारों ने हाईकोर्ट से स्टे ले रखा था, सुप्रीम कोर्ट ने वो सारे स्टे ऑर्डर भी एक झटके में खत्म कर दिए. कोर्ट में नगर निगम की तरफ से कहा गया कि हम एक्शन लेना चाहते हैं, लेकिन दबाव में काम नहीं हो पा रहा. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि कानून से ऊपर कोई नहीं, कार्रवाई में ढिलाई मंजूर नहीं. कोर्ट में जजों ने सरकार के वकील को फटकार लगाई. 

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जानिए, क्या है पूरा मामला? 

दरअसल, भोपाल में अरेरा, रोहित नगर, बावड़िया जैसे इलाकों में घरों में धड़ल्ले से दुकानें, शोरूम और ऑफिस खुल गए. इन दुकानों और शोरूम की संख्या 30 हजार से भी ज्यादा है. इसी को लेकर स्थानीय रहवासियों ने विरोध किया, पैदल मार्च निकाला और कहा - पार्किंग, ट्रैफिक और सुरक्षा का बुरा हाल है. दूसरी तरफ व्यापारियों के संगठन BCCI का कहना है क‍ि 2005 के बाद मास्टर प्लान ही नहीं बना है, तो व्यापारी जाएं कहां. मजबूरी में घर से ही काम करना पड़ रहा है. 

सरकार ने दी थी राहत

शिकायत पर सुप्रीम कोर्ट ने निगम को सीलिंग करने को कहा था. निगम ने नोटिस दिए, कुछ दुकानें सील भी कीं. लेकिन फिर CM डॉ. मोहन यादव की बैठक में 10 सदस्यीय समीक्षा समिति बना दी गई और कहा गया - रिपोर्ट आने तक दुकानदारों को राहत दो. कई सील दुकानें फिर खुल गईं. इसी बात को याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने सुप्रीम कोर्ट में उठाया कि आदेश के बाद भी ग्राउंड पर कुछ नहीं हो रहा. मंगलवार को भी वीसी से सुनवाई हुई थी और बुधवार को कोर्ट ने बड़ा फैसला सुना दिया.

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कोर्ट ने तीन हफ्ते में जवाब मांगा 

सुप्रीम कोर्ट के सख्‍त रुख के बाद यह तय है कि राजधानी में फिर से सीलिंग अभियान तेज होगा. अवैध निर्माण और रेजिडेंशियल में कमर्शियल यूज पर नगर निगम को सख्त कार्रवाई करनी ही पड़ेगी. कोर्ट ने तीन हफ्ते में जवाब मांगा है.

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