धार की भोजशाला से जुड़ा नमाज विवाद एक बार फिर चर्चा में है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने नमाज की व्यवस्था को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं, लेकिन प्रस्तावित जमीन को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने कड़ा विरोध जताया है. ग्रामीणों का दावा है कि जिस जमीन पर नमाज की व्यवस्था की जा रही है, वह उनकी पुश्तैनी और कृषि भूमि है, जहां उनका परिवार पिछले कई दशकों से खेती करता आ रहा है. प्रशासन और मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के बीच देर रात बैठक चली.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन सक्रिय
भोजशाला से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देशों के बाद जिला प्रशासन ने व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है. कोर्ट के निर्देश के अनुसार भोजशाला परिसर के पीछे स्थित सर्वे नंबर 611 और 612 की जमीन पर शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक जुम्मे की नमाज अदा कराने की तैयारी की जा रही है. इसके बाद कलेक्टर राजीव रंजन मीणा और एसपी सचिन शर्मा सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर सुरक्षा और आवागमन की व्यवस्थाओं का जायजा लिया.
प्रशासनिक बैठक के बाद ग्रामीणों का प्रदर्शन
देर रात प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच बैठक हुई. बैठक समाप्त होने के बाद भोजशाला के पीछे रहने वाले ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. उनका कहना है कि प्रशासन ने जिस जमीन को नमाज के लिए चिन्हित किया है, वह निजी कृषि भूमि है और उन्हें इस संबंध में पहले कोई सूचना या नोटिस नहीं दिया.
ग्रामीणों का दावा- हमारी पुश्तैनी जमीन है
स्थानीय किसान जगदीश नागर और अभिनव बिजवा ने बताया कि सर्वे नंबर 611 की जमीन उनके परिवार की पुश्तैनी भूमि है. उनका कहना है कि उनका परिवार सात पीढ़ियों से इस जमीन पर खेती और बागवानी कर रहा है. ग्रामीणों ने दावा किया कि राजस्व रिकॉर्ड और कर रसीदों में भी उनके नाम दर्ज हैं, जो उनके मालिकाना हक को साबित करते हैं.
ग्रामीणों का कहना है कि जमीन पर इस समय फसल खड़ी है. ऐसे में यदि यहां किसी प्रकार की व्यवस्था की जाती है तो खेती और फसल को नुकसान पहुंच सकता है. उन्होंने प्रशासन को स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने सभी दस्तावेज और कर रसीदें अधिकारियों के सामने प्रस्तुत करेंगे और अपनी बात मजबूती से रखेंगे.
सांप्रदायिक तनाव बढ़ने की आशंका
निवासियों का कहना है कि प्रस्तावित स्थान भोजशाला परिसर के बेहद करीब है. ऐसे में यहां किसी भी नई व्यवस्था से विवाद और तनाव बढ़ने की संभावना है. ग्रामीणों ने प्रशासन से पुनर्विचार करने की मांग करते हुए कहा कि संवेदनशील क्षेत्र होने के कारण सभी पक्षों की सहमति और कानून के दायरे में निर्णय लिया जाना चाहिए.
मुस्लिम समाज के साथ देर रात चली बैठक
दूसरी ओर जिला प्रशासन और मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के बीच देर रात करीब एक घंटे तक बैठक हुई. बैठक में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन और नमाज की व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा की गई. मुस्लिम समाज के सदर अब्दुल समद ने बताया कि प्रशासन ने उन्हें प्रस्तावित स्थल और व्यवस्थाओं की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सुबह मौके का निरीक्षण करने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.
मुस्लिम समाज की ओर से यह भी कहा गया कि निर्धारित स्थल पर बारिश के कारण कीचड़ और मिट्टी जमा है. ऐसे में नमाज की व्यवस्था को लेकर कुछ व्यावहारिक दिक्कतें मौजूद हैं. उनका कहना है कि समाज नमाज अदा करने के लिए तैयार है, लेकिन व्यवस्थाएं किस प्रकार होंगी, यह प्रशासन द्वारा किए गए इंतजामों पर निर्भर करेगा.