MP News: भिंड में टोल पर बवाल, मुंडन कर युवाओं का प्रदर्शन, संत कालीदास ने FIR पर उठाए सवाल

Bhind Toll Dispute: भिंड के बरेठा टोल प्लाजा पर "No Road No Toll" आंदोलन के बाद मामला गरमा गया है. युवाओं ने मुंडन कर विरोध जताया, जबकि संत कालीदास ने FIR को राजनीतिक षड्यंत्र बताया.

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Bhind Toll Dispute: मध्य प्रदेश के भिंड जिले के बरेठा टोल प्लाजा पर "No Road-No Toll" आंदोलन के बाद हालात लगातार गरमाते जा रहे हैं. बीएसपी नेता रक्षपाल सिंह राजावत पर गुंडागर्दी के आरोप और उनके खिलाफ दर्ज FIR ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है.

भूख हड़ताल खत्म, जांच की मांग तेज

तीन दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे प्रदर्शनकारी युवाओं ने शुक्रवार को अपना आंदोलन समाप्त कर दिया. हड़ताल खत्म करने से पहले युवाओं ने एसडीएम अखिलेश शर्मा को आईजी के नाम ज्ञापन सौंपा. इसमें FIR की निष्पक्ष जांच की मांग की गई.

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मुंडन कर जताया अनोखा विरोध

प्रदर्शन के दौरान 11 युवाओं ने मुंडन कराकर विरोध दर्ज कराया. इसे प्रशासन और सरकार पर दबाव बनाने के प्रतीकात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है. इस तरह का विरोध क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बन गया है. 

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संत कालीदास ने लगाए गंभीर आरोप

आंदोलन में शामिल संत समिति के जिला अध्यक्ष संत कालीदास महाराज ने साफ कहा कि पूरा आंदोलन शांतिपूर्ण था. उन्होंने आरोप लगाया कि बीएसपी नेता के खिलाफ दर्ज FIR राजनीतिक दबाव और षड्यंत्र के तहत कराई गई है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर टोल प्लाजा को नुकसान हुआ है तो उसकी भरपाई की जा सकती है, लेकिन इस तरह की कार्रवाई उचित नहीं है.

16 मार्च को हुआ था बड़ा हंगामा

गौरतलब है कि 16 मार्च 2026 को "No Road-No Toll" आंदोलन के दौरान टोल प्लाजा पर भारी विवाद हुआ था. प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि टोल फ्री घोषित होने के बावजूद फास्टैग के जरिए वसूली की जा रही थी. इसी बात को लेकर विवाद बढ़ा और स्थिति उग्र हो गई.

CCTV में कैद हुई घटना, FIR दर्ज

आरोप है कि इसी दौरान बीएसपी नेता रक्षपाल सिंह राजावत अपने समर्थकों के साथ टोल कंट्रोल रूम में घुस गए और तोड़फोड़ की. CCTV कैमरे भी तोड़े गए. यह पूरी घटना मीडिया कैमरों में कैद हुई, जिससे मामला और ज्यादा सुर्खियों में आ गया. टोल मैनेजर अमित राठौर की शिकायत पर पुलिस ने राजावत सहित तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296(b), 351(2), 324(4) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है.

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अब राजनीतिक रंग में रंगा विवाद

FIR के बाद यह मामला अब सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है. इसमें राजनीतिक रंग भी साफ नजर आने लगा है. एक ओर प्रदर्शनकारी निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं संत समाज और स्थानीय संगठनों की सक्रियता से आंदोलन के फिर तेज होने के संकेत मिल रहे हैं.

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