फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाना पड़ा भारी, अतिथि विद्वान बनी महिला को 3 साल की सजा, कोर्ट ने जुर्माना भी लगाया

Madhya Pradesh News: अतिथि विद्वान बनी महिला को फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाना पड़ा भारी पड़ गया. जिला व सत्र न्यायालय भिंड ने महिला को 3 साल की सजा सुनाई है. साथ ही 10000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है.

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Fake Experience Certificate: सरकारी महाविद्यालय में अतिथि विद्वान की नौकरी पाने के लिए फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाना ग्वालियर निवासी महिला राजकुमारी कैन को महंगा पड़ गया. जिला व सत्र न्यायालय भिंड ने मामले को गंभीर धोखाधड़ी मानते हुए आरोपी महिला को आईपीसी की धारा 420 और 471 के तहत तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. इसके साथ ही न्यायालय ने दोनों धाराओं में 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है.

अपर जिला लोक अभियोजन अधिकारी (एडीपीओ) अवधेश चौधरी ने बताया कि यह पूरा मामला वर्ष 2016 का है. उस समय पीएमश्री एमजेएस महाविद्यालय भिंड में उद्यमिता विषय के अतिथि विद्वान पद के लिए भर्ती प्रक्रिया चल रही थी. इसी भर्ती के तहत राजकुमारी कैन ने आवेदन प्रस्तुत किया था.

नौकरी पाने के लिए लगाए गए कूटरचित दस्तावेज

आरोपी महिला ने अपने आवेदन के साथ शासकीय महाविद्यालय सीहोर, गुना और दतिया से जारी बताए गए अनुभव प्रमाण पत्र संलग्न किए थे. इन प्रमाण पत्रों के आधार पर उसने स्वयं को योग्य और अनुभवी बताने का प्रयास किया, ताकि अतिथि विद्वान की नौकरी हासिल की जा सके.

महाविद्यालय प्रबंधन को हुआ संदेह

आवेदन की जांच के दौरान महाविद्यालय प्रबंधन को प्रस्तुत अनुभव प्रमाण पत्रों की भाषा, प्रारूप और विवरण पर संदेह हुआ. इसके बाद महाविद्यालय द्वारा एक जांच समिति गठित की गई. समिति ने प्रमाण पत्रों की सत्यता की जांच के लिए संबंधित शासकीय महाविद्यालयों—सीहोर, गुना और दतिया—से आधिकारिक पत्राचार किया.

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जांच में हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा

संबंधित संस्थानों से प्राप्त जवाब में स्पष्ट हुआ कि राजकुमारी कैन को उनके यहां कभी भी अतिथि विद्वान अथवा किसी अन्य पद पर कार्य का कोई अनुभव नहीं रहा है. किसी भी संस्थान द्वारा उसके नाम से कोई अनुभव प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया था. जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में सभी दस्तावेजों को पूरी तरह फर्जी और कूटरचित बताया.

2017 में दर्ज हुआ आपराधिक मामला

जांच रिपोर्ट के आधार पर वर्ष 2017 में कोतवाली थाना भिंड में आरोपी महिला के खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचना का प्रकरण दर्ज किया गया. पुलिस जांच के बाद मामला न्यायालय में प्रस्तुत किया गया.

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अभियोजन पक्ष ने पेश किए पुख्ता सबूत

मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने जांच समिति की रिपोर्ट, संबंधित शासकीय महाविद्यालयों से प्राप्त पत्र, दस्तावेजी साक्ष्य और गवाह न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए. साक्ष्यों के आधार पर यह सिद्ध हुआ कि आरोपी महिला ने जानबूझकर फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर सरकारी पद प्राप्त करने का प्रयास किया.

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि सरकारी पद पाने के लिए कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल करना न केवल अपराध है, बल्कि यह पूरी भर्ती प्रक्रिया और शासन की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है. कोर्ट ने इसे गंभीर धोखाधड़ी मानते हुए आरोपी को दोषी करार दिया.

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जुर्माना नहीं भरने पर एक साथ भुगतनी होंगी सजाएं

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आरोपी द्वारा जुर्माने की राशि जमा नहीं की जाती है, तो उसे दोनों सजाएं एक साथ भुगतनी होंगी. फैसले के बाद शिक्षा विभाग और महाविद्यालय प्रशासन में हड़कंप की स्थिति है. यह निर्णय फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी पाने वाले लोगों के लिए कड़ा और स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि ऐसे मामलों में अब न्यायालय सख्त रुख अपनाने से पीछे नहीं हटेगा.

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