जतारा से अशोकनगर तक चर्चे... जहां पोस्टिंग वहां दिखाया कमाल, सादगी इतनी कि सिंधिया भी कायल, जानें इस युवा IAS अफसर की प्रेरणादायक कहानी

Ashoknagar Collector IAS officer Aditya Singh: अशोकनगर कलेक्टर एक बार फिर सुर्खियों में हैं. उन्होंने एसआईआर सर्वे में सबसे पहले 100 प्रतिशत डिजिटिलाइजेशन का काम पूरा कर दिखाया है. यह मध्यप्रदेश का पहला जिला बना है, जहां एसआईआर सर्वे का 100 प्रतिशत डिजिटिलाइजेशन का काम पूरा हो चुका है. ऐसे में आज इस युवा IAS अधिकारी के बारें में जानते हैं. ये कैसे रीवा से निकलकर कलेक्टर बने?

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IAS Officer Aditya Singh: मध्य प्रदेश में एक युवा IAS अधिकारी (IAS officer) अपनी कार्यशैली और नवाचारों के दम पर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं. टीकमगढ़ के जतारा इलाके से लेकर अशोकनगर तक... जहां भी जिम्मेदारी मिली वहां इस अधिकारी ने विकास की नई मिसाल पेश की. उन्होंने एसआईआर सर्वे में सबसे पहले 100 प्रतिशत डिजिटिलाइजेशन का काम पूरा कर दिखाया है. इतना ही नहीं कुछ दिन पहले इनके योग्य कार्य के लिए  ज्योतिरादित्य सिंधिया ने तारीफ में कसीदे पढ़े थे. ऐसे में यहां आपको बताते हैं इस अफसर के बारे में सबकुछ...

जहां पोस्टिंग वहां कर दिखाया कमाल 

यह अफसर अधिकारी कोई और नहीं बल्कि अशोकनगर के कलेक्टर आदित्य सिंह हैं. कलेक्टर आदित्य ने एसआईआर सर्वे में अशोकनगर में सबसे पहले 100 प्रतिशत डिजिटिलाइजेशन का काम पूरा कर दिखाया. जिसके बाद वो सुर्खियों में आ गए. इससे पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कलेक्टर आदित्य सिंह की तारीफ करते हुए कहा था, 'आपके पास ऐसे कलेक्टर हैं जो गाड़ी में बैठकर बत्ती नहीं जलाते, बल्कि साइकिल पर बैठकर अशोकनगर से चंदेरी पहुंच जाते हैं. 

अशोकनगर के कलेक्टर आदित्य सिंह 2014 बैच के IAS अधिकारी हैं. ये हर दिन साइकिल से फील्ड पर उतरते हैं और लोगों से उनका हाल जानते हैं. 

न कोई दिखावा, न कोई शोर—बस सादगी से भरी एक यात्रा, जिसमें जनता के लिए समर्पण छिपा है. उनकी यह आदत सिर्फ ट्रांसपोर्ट नहीं, बल्कि एक मजबूत संदेश है कि असली ताकत बड़े पद या महंगी गाड़ी में नहीं, बल्कि सरलता और सेवा भावना में होती है. जनता की भलाई उनके लिए जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जुनून है... उनकी सादगी और ईमानदारी लोगों को प्रेरित करती है.

अशोकनगर कलेक्टर आदित्य सिंह अपने तेज तर्रार अंदाज के लिए न केवल जाने जाते हैं, बल्कि किस तरह मैदानी अमले से व जनसहयोग से कैसे काम कराया जाता है उसका भी उदाहरण इनके द्वारा पेश किया जा रहा है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण पेश किया है मध्य प्रदेश में सबसे पहले अशोकनगर में  SIR का 100 प्रतिशत डिजिटिलाइजेशन का काम पूरा कराना. खास यह कि जब एसआईआर सर्वे के दौरान प्रदेश में कई कर्मचारियों की मौत हो गई और कई जगह से काम करने में काफी परेशानी की बातें सामने आई, लेकिन अशोकनगर मध्य प्रदेश में सबसे पहले 100 प्रतिशत डिजिटिलाइजेशन का काम पूरा करने वाला जिला बना. 

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कलेक्टर आदित्य सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान लिगांनुपात सुधारने, कुपोषण दूर करने, बाढ़ पीड़ितों को हर जरूरत की सामान उनतक पहुंचाने तक.... बेहतर कार्य किया है.

अशोकनगर में रेवा शक्ति अभियान और हृदय अभियान चलाया गया है. साथ ही जिले की ऐतिहासिक करीला धाम माता जानकी के दरबार में सीता रसोई का शुभारंभ किया है. 

उन्होंने जिला में लिगांनुपात सुधारने के लिए 'रेवा शक्ति अभियान' शुरू किया. वहीं कुपोषण से मुक्ति के लिए 'ह्रदय अभियान' चलाया जा रहा है. इस अभियान के तहत एक एक गांव में टीम को भेजकर कुपोषित बच्चों को चिन्हित करके उनको मोरिंगा पाउडर सहित अन्य सेहत की टोकरी देकर दिया जा रहा है. कलेक्टर आदित्य सिंह ने लगातार कुपोषण से बच्चों को बाहर लाने का प्रयास कर रहे हैं. इतना ही नहीं अशोकनगर में अभी तक सैकड़ों बच्चे कुपोषण के दंश से बाहर आए हैं.

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आदित्य सिंह ने UPSC परीक्षा में हासिल की थी 47 रैंक

कलेक्टर आदित्य सिंह का जन्म 8 मार्च 1990 को रीवा जिले में हुआ है. उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा रीवा के ज्योति हायर सेकेंडरी स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद आईआईटी की तैयारी के लिए 02 वर्ष कोटा में पढ़ाई की. 11वीं और 12 वीं की पढ़ाई कोटा स्थित DAV स्कूल से की. इसके बाद 2008 से 2012 तक आईआईटी रुड़की से BTech किया. पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्होंने UPSC की तैयारी दिल्ली से की. कलेक्टर आदित्य सिंह ने 2014 में प्रथम प्रयास में ही ऑल इंडिया 47 रैंक हासिल की.

टीकमगढ़ के जतारा में हुई थी आदित्य सिंह की पहली पोस्टिंग

UPSC में सफलता हासिल करने के बाद उनकी पहली पदस्थापना यानी ⁠प्रथम पोस्टिंग टीकमगढ़ के जतारा में एसडीएम के पद पर हुई. फिर मंदसौर जिला पंचायत सीईओ बने... इसके बाद होशंगाबाद में जिला पंचायत सीईओ के पद पर पोस्टिंग हुई. इसके अलावा भोपाल Smart City के CEO बने. फिर गुना ADM के पद पर पदस्त हुए. वहीं विज्ञान व प्रौद्योगिकी विभाग के उप सचिव भी रहे.

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कैसे कलेक्टर बने आदित्य सिंह?

बता दें कि फटका फैक्ट्री ब्लास्ट के बाद आदित्य सिंह को हरदा जिले में कलेक्टर पद की कमान दी गई. वो कलेक्टर के रूप में फरवरी 2024 से अप्रैल 2025 तक पदस्थ रहे.

शानदार काम कर आदित्य सिंह  ने दिखाया कमाल

आदित्य सिंह की जिन जिलों में भी उनकी पोस्टिंग रही है, वहां शानदार काम कर कमाल दिखाया है. उन्होंने कई नवाचार किए और उनके द्वारा आज भी किया जा रहा है... उनके द्वारा लगातार घटते लिंगानुपात को लेकर  'रेवा शक्ति अभियान' चलाया गया और आज भी अशोकनगर में जारी है. साथ ही कुपोषण से मुक्ति को लेकर 'ह्रदय अभियान' चलाया गया. अशोकनगर में भी बच्चों को इस दंश से बहार लाने के लिए 'ह्रदय अभियान' चलाया जा रहा है.

कई बार सम्मानित हो चुके हैं कलेक्टर आदित्य सिंह

इनके द्वारा किए गए कामों के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया है. जब गुना में बतौर एसडीएम थे, तब पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान द्वारा पुरुस्कृत किया गया था. दरअसल, उन्हें भू-अर्जन, राजस्व कार्य और राजस्व प्रकरणों के उत्कृष्ट निराकरण के लिए सम्मानित किया गया था. इसके बाद जब बतौर कलेक्टर के पद थे, तब मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई छगनभाई पटेल ने सम्मानित किया था. बता दें कि हरदा जिले में सशस्त्र सेना झंडा दिवस निधि की राशि लक्ष्य से अधिक जमा करने पर प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने कलेक्टर आदित्य सिंह को सम्मानित किया था.

हरदा जिले को सशस्त्र सैनिकों के कल्याण के लिए झंडा दिवस निधि की राशि 2.28 लाख रुपये जमा करने का लक्ष्य था, लेकिन उन्होंने कुल 5 लाख 17 हजार 575 रुपये जमा कराए थे. 

कलेक्टर आदित्य सिंह अपनी सागदी के लिए भी मशहूर हैं. न काफिला, न दिखावा... सिर्फ एक साइकिल और जनता के लिए सच्चा समर्पण... वो अशोकनगर में लगातार साइकिल से भ्रमण करते हैं और जनता तक पहुंचते हैं. इस दौरान वो लोगों से हाल चाल और परेशानियों को जानते हैं. इसके बाद तुरंत हल भी करते हैं. 

कलेकटर आदित्य सिंह ने NDTV को बाताया कि उनके द्वारा साइकिलिंग के माध्यम से शारीरिक रूप से फिट रहने और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश दिया जाता है. 

युवाओं को दिया खास संदेश

उन्होंने यंग जनरेशन को संदेश देते हुए कहा, 'यंग जनरेशन को यही संदेश देना चाहेंगे की कड़ी मेहनत और आत्म विश्वास से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है. समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना हम सब की जिम्मेदारी है, जिसको हम सबको निभाना है. उसके लिए परिश्रम कर के अपनी सहभागिता देनी है.

कलेकटर आदित्य सिंह ने खाद संकट और मध्य प्रदेश SIR में सबसे पहले सौ प्रतिशत काम पूरा करने पर कहा कि ⁠यह कार्य टीम वर्क के माध्यम से और अग्रिम योजना बना के किया गया. प्रतिदिन VC के माध्यम से प्रति मतदान केंद्र की समीक्षा की गई. मैदानी अमले के मेहनत और सतत निगरानी से इसको हासिल किया गया.

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