मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में 'केन-बेतवा लिंक परियोजना' से प्रभावित हुए विस्थापितों की मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर का अनशन खत्म हो गया है. उन्होंने अपनी मां के आग्रह पर पिछले 18 दिनों से जारी आमरण अनशन को समाप्त किया है. अमित भटनागर छतरपुर के जिला अस्पताल में भर्ती थे, जहां से छुट्टी मिलने के बाद उन्हें बिजावर रेस्ट हाउस भेजा गया है, जहां प्रशासनिक अधिकारियों ने उनसे चर्चा भी की थी. इसके बाद उन्हें उनके घर भेजा गया. जहां अमित भटनागर के भाई अंकित ने बताया कि उनकी तबीयत ठीक नहीं थी. ऐसे में मां के कहने पर उन्होंने नारियल पानी पीकर अनशन समाप्त किया है.
18 दिन तक चला अमित भटनागर का अनशन
छतरपुर के कलेक्टर पार्थ जायसवाल के मुताबिक अमित के स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद उन्हें उनके गृहनगर भेजा गया था. अमित 6 जुलाई से आमरण अनशन पर थे. लेकिन आंदोलन से जुड़ी मांगों पर न्यायसंगत कार्रवाई और सकारात्मक पहल के बाद ही अनशन खत्म किया गया है. प्रशासन की तरफ से भी उनसे संवाद किया गया है. जिसके चलते ग्रामीणों और प्रशासन के बीच गतिरोध खत्म हुआ है. अमित की मां और स्थानीय महिलाओं ने उन्हें नारियल पिलाया और अनशन तोड़ा. इससे पहले पुलिस ने 19 जुलाई को मॉनसून के दौरान बराना नदी का जलस्तर बढ़ने का हवाला देते हुए कूपी गांव में चल रहे प्रदर्शन को समाप्त करा दिया था.
अमित भटनागर का आरोप
दरअसल, यह प्रदर्शन तीन जुलाई को छतरपुर जिले के बराना नदी पर निर्माणाधीन पुल के नीचे शुरू हुआ था. जहां ग्रामीणों ने प्रदर्शनकारी केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और अन्य सिंचाई योजनाओं से विस्थापित लोगों के पुनर्वास तथा मुआवजा वितरण में कथित अनियमितताओं की जांच, प्रभावित परिवारों को वैधानिक अधिकार दिए जाने और लंबित मामलों का समाधान करने की मांग कर रहे थे.
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि पुनर्वास पैकेज के क्रियान्वयन में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है. उन्होंने लाभ से वंचित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए निष्पक्ष जांच की मांग की थी. अमित का दावा था जिस दिन प्रशासन ने प्रदर्शन स्थल खाली कराया, उस दिन वह करीब 400 करोड़ रुपये की कथित अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज मीडिया के सामने रखने की तैयारी कर रहे थे. लेकिन जब मांगे नहीं मानी गई तो उन्होंने अनशन शुरू किया था.
क्या है केन बेतवा लिंक परियोजना विवाद
दरअसल, 44,605 करोड़ रुपये की लागत वाली केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजनाद देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना है. इसका उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र में 10.62 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई, करीब 62 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराना और जलविद्युत उत्पादन करना है. लेकिन इसमें छतरपुर और टीकमगढ़ जिले के बीच विवाद भी सामने आए हैं.
इसी योजना से विस्थापित हो रहे ग्रामीणों के हक में सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने 6 जुलाई 2026 से छतरपुर में आमरण अनशन शुरू किया था. वह 'जय किसान संगठन' से जुड़े हैं. जिसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विस्थापन की जद में आने वाले आखिरी आदिवासी और गरीब ग्रामीण को भी उसका कानूनी हक, उचित मुआवजा और पुनर्वास मिले. हालांकि अनशन खत्म करने के बाद उन्होंने स्पष्ट किया है कि आगे भी मांगें जारी रहेगी.
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