Swami Vivekananda Jayanti 2026: असंभव से भी आगे; युवा दिवस पर जानिए स्वामी विवेकानंद के जीवन, विचार व भाषण

National Youth Day 2026: राष्ट्रीय युवा दिवस हर साल 12 जनवरी को महान आध्यात्मिक नेता, दार्शनिक और विचारक स्वामी विवेकानंद की स्मृति में मनाया जाता है. स्वामी विवेकानंद का प्रेरक जीवन और सशक्त संदेश युवाओं को देता है. 15-29 वर्ष के आयु वर्ग के भीतर युवाओं को परिभाषित किया जाता है, जो भारत की कुल आबादी का लगभग 40% हिस्सा हैं.

विज्ञापन
Read Time: 8 mins
Swami Vivekananda Jayanti 2026: असंभव से भी आगे; युवा दिवस पर जानिए स्वामी विवेकानंद के जीवन, विचार व भाषण

Swami Vivekananda Jayanti 2026: युवाओं के लिये प्रेरणास्रोत के रूप में स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) की जयंती, 12 जनवरी को हर वर्ष भारत में राष्ट्रीय युवा दिवस (National Youth Day 2026) तथा राष्ट्रीय युवा सप्ताह मनाया जाता है. राष्ट्रीय युवा सप्ताह (National Youth Week) के एक हिस्से के रूप में भारत सरकार प्रत्येक वर्ष राष्ट्रीय युवा महोत्सव का आयोजन करती है और इस महोत्सव का उद्देश्य राष्ट्रीय एकीकरण, सांप्रदायिक सौहार्द्र तथा भाईचारे में वृद्धि करना है. इस साल स्वामी विवेकानंद की 164वीं जयंती है. स्वामी विवेकानंद का मानना था कि किसी भी राष्ट्र का युवा जागरूक और अपने उद्देश्य के प्रति समर्पित हो, तो वह देश किसी भी लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है. युवाओं को सफलता के लिये समर्पण भाव को बढ़ाना होगा तथा भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिये तैयार रहना होगा, विवेकानंद युवाओं को आध्यात्मिक बल के साथ-साथ शारीरिक बल में वृद्धि करने के लिये भी प्रेरित करते हैं.

युवा कौन हैं?

राष्ट्रीय युवा दिवस हर साल 12 जनवरी को महान आध्यात्मिक नेता, दार्शनिक और विचारक स्वामी विवेकानंद की स्मृति में मनाया जाता है. स्वामी विवेकानंद का प्रेरक जीवन और सशक्त संदेश युवाओं को देता है. 15-29 वर्ष के आयु वर्ग के भीतर युवाओं को परिभाषित किया जाता है, जो भारत की कुल आबादी का लगभग 40% हिस्सा हैं. समाज के सबसे जीवंत और गतिशील क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए, यह समूह देश का सबसे मूल्यवान मानव संसाधन है.

किसी भी देश के महापुरुष उस देश के लिए एक 'पावर हाउस' की तरह होते हैं और भारत के महापुरुष न सिर्फ अपने देश, बल्कि पूरी दुनिया के लिए 'पावर हाउस' का काम करते हैं. कुछ ऐसे ही महापुरुष थे स्वामी विवेकानंद, जिनकी संकल्प शक्ति, विचारों की ऊर्जा, आध्यात्म और आत्मविश्वास को 'पावर हाउस' कह सकते हैं. "उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए." स्वामी विवेकानंद के ऐसे कई संदेश देश और दुनिया के लाखों-करोड़ों लोगों को प्रेरणा देते हैं. 

Advertisement

स्वामी विवेकानंद का जीवन (Swami Vivekananda Life)

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी, 1863 में हुआ था. इनके बचपन का नाम नरेंद्र नाथ दत्त था और इनके गुरु का नाम रामकृष्ण परमहंस था. अपने गुरु के नाम पर विवेकानंद ने रामकृष्ण मिशन तथा रामकृष्ण मठ की स्थापना की. विश्व में भारतीय दर्शन विशेषकर वेदांत और योग को प्रसारित करने में विवेकानंद की महत्त्वपूर्ण भूमिका है, साथ ही ब्रिटिश भारत के दौरान राष्ट्रवाद को अध्यात्म से जोड़ने में इनकी भूमिका महत्त्वपूर्ण मानी जाती है. इसके अतिरिक्त स्वामी विवेकानंद ने जातिवाद, शिक्षा, राष्ट्रवाद, धर्म निरपेक्षतावाद, मानवतावाद पर अपने विचार प्रस्तुत किये हैं, विवेकानंद की शिक्षाओं पर उपनिषद्, गीता के दर्शन, बुद्ध एवं ईसा मसीह के उपदेशों का प्रभाव है. उन्होंने वर्ष 1893 में शिकागो विश्व धर्म सम्मलेन में वैश्विक ख्याति अर्जित की तथा इसके माध्यम से ही भारतीय अध्यात्म का वैश्विक स्तर पर प्रचार-प्रसार हुआ.

वर्ष 1893 में खेतड़ी राज्य के महाराजा अजीत सिंह के अनुरोध पर उन्होंने 'विवेकानंद' नाम अपनाया. उन्होंने विश्व को वेदांत और योग के भारतीय दर्शन से परिचित कराया. वर्ष 1902 में बेलूर मठ में उनकी मृत्यु हुई थी.

भारत में 19वीं सदी में अंग्रेजी शासन का बोलबाला था. आजादी के लिए उठते सुरों के उस दौर में 12 जनवरी 1863 को स्वामी विवेकानंद का जन्म हुआ. माता-पिता ने बालक का नाम नरेंद्र रखा. इसके बाद वे आध्यात्म से सराबोर होकर स्वामी विवेकानंद कहलाए.

Advertisement

कहा जाता है कि स्वामी विवेकानंद के जीवन को बदल देने में 'रोसोगुल्ला' का बहुत बड़ा हाथ रहा है. उन्हें खाने और खिलाने का शौक था. उनके खाने के इसी शौक को लेकर एक किताब 'स्वामी विवेकानंद: द फीस्टिंग, फास्टिंग मॉन्क' लिखी गई. रोम्या रोलां ने 'लाइफ ऑफ विवेकानंद' में लिखा, "स्वामी विवेकानंद का शरीर एक पहलवान की तरह मजबूत और शक्तिशाली था. वो 5 फीट साढ़े 8 इंच लंबे थे. कभी-कभी विवेकानंद खुद अपना ही मजाक उड़ाते हुए खुद को 'मोटा स्वामी' कहकर पुकारते थे."

हालांकि, स्वामी विवेकानंद की सोच और उनका दर्शन विश्वबंधुत्व की भावना से भरा हुआ था. वे ऐसा समाज चाहते थे, जहां बड़े से बड़ा सत्य सामने आ सके. सत्य उनका देवता था और वे पूरी दुनिया को अपना देश मानते थे.

Advertisement
9 सितंबर 1895 को श्री आलसिंगा पेरूमल को लिखा था, "मेरे बारे में तुम इतना जान लेना कि मैं किसी के कहने पर नहीं चलूंगा. मेरे जीवन का क्या व्रत है, वो मैं स्वयं तय करता हूं. किसी राष्ट्र-विशेष के प्रति न मेरा अनुराग है और न मेरा विद्वेष है. जैसे मैं भारत का हूं, वैसे ही पूरे दुनिया का हूं."

जिस दौर में स्वामी विवेकानंद अपने जीवन के शिखर पर थे, उस दौर में भारत अंग्रेजों का गुलाम था. उसी समय में युवा पीढ़ी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था, "उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए. तुम जो सोच रहे हो, उसे अपनी जिंदगी का विचार बनाओ. उसके बारे में सोचो. उसके लिए सपने देखो, उस विचार के साथ जीयो. तुम्हारे दिमाग में, तुम्हारी मांसपेशियों में, तुम्हारी नसों में और तुम्हारे शरीर के हर हिस्से में वो विचार भरा होना चाहिए. यही सफलता का सूत्र है."

"तुम लोग कमर कसकर काम में जुट जाओ, हुंकार मात्र से हम दुनिया को पलट देंगे. अभी तो केवल शुरुआत है, मेरे बच्चों..."

स्वामी विवेकानंद ने यह 1895 में स्वामी ब्रह्मानंद को भेजे पत्र में लिखा था. यह युवाओं को उत्साहित करने और उनमें आत्मविश्वास जगाने के लिए कहा गया था, ताकि वे बड़ी ऊर्जा और संकल्प के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ें और परिवर्तन ला सकें. इन विचारों ने भारत के युवाओं के मन में स्वतंत्रता और स्वाभिमान के बीज बोए. स्वामी विवेकानंद ने भारत के लोगों को भारत से प्यार करना सिखाया.

स्वामी विवेकानंद के विचारों की कीमत को इस तरह समझा जा सकता है कि खुद महात्मा गांधी ने उनके साहित्य को पढ़ा था. इसके बाद महात्मा गांधी ने लिखा था, "मैंने स्वामी विवेकानंद के विचारों को गहराई से समझा और उनके विचारों की गहराई में उतरने के बाद उनकी वजह से अब देश के प्रति प्रेम एक हजार गुना बढ़ गया." कम से कम 70-80 बरस जीने वालों में स्वामी विवेकानंद हो सकते थे, लेकिन वह पहले ही कह चुके थे कि 40 की उम्र पूरी नहीं करूंगा. उनकी वह भविष्यवाणी सच निकली. स्वामी विवेकानंद ने 39 वर्ष, 5 महीने और 22 दिन के बाद दुनिया को अलविदा कह दिया था.

स्वामी विवेकानंद जी के कोट्स (Swami Vivekananda Quotes)

एक समय में एक काम करो, और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमे डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ.

तुम्हें कोई पढ़ा नहीं सकता, कोई आध्यात्मिक नहीं बना सकता. तुमको सब कुछ खुद अंदर से सीखना हैं.

जैसा तुम सोचते हो, वैसे ही बन जाओगे. खुद को निर्बल मानोगे तो निर्बल और सबल मानोगे तो सबल ही बन जाओगे.

कुछ मत पूछो, बदले में कुछ मत मांगो. जो देना है वो दो, वो तुम तक वापस आएगा, पर उसके बारे में अभी मत सोचो.

वह नास्तिक है, जो अपने आप में विश्वास नहीं रखता.

ऐतिहासिक भाषण के अंश (Swami Vivekananda Speech)

अपने भाषण के दौरान स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था कि अमरीकी भाइयों और बहनों, आपने जिस स्नेह के साथ मेरा स्वागत किया है उससे मेरा दिल भर आया है. मैं दुनिया की सबसे पुरानी संत परंपरा और सभी धर्मों की जननी की तरफ़ से धन्यवाद देता हूं. सभी जातियों और संप्रदायों के लाखों-करोड़ों हिंदुओं की तरफ़ से आपका आभार व्यक्त करता हूं. मैं इस मंच पर बोलने वाले कुछ वक्ताओं का भी धन्यवाद करना चाहता हूं जिन्होंने यह ज़ाहिर किया कि दुनिया में सहिष्णुता का विचार पूरब के देशों से फैला है. मुझे गर्व है कि मैं उस धर्म से हूं जिसने दुनिया को सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ पढ़ाया है. हम सिर्फ़ सार्वभौमिक सहिष्णुता पर ही विश्वास नहीं करते बल्कि, हम सभी धर्मों को सच के रूप में स्वीकार करते हैं. मुझे गर्व है कि मैं उस देश से हूं जिसने सभी धर्मों और सभी देशों के सताए गए लोगों को अपने यहां शरण दी. मुझे गर्व है कि हमने अपने दिल में इसराइल की वो पवित्र यादें संजो रखी हैं जिनमें उनके धर्मस्थलों को रोमन हमलावरों ने तहस-नहस कर दिया था और फिर उन्होंने दक्षिण भारत में शरण ली.

ये भी पढ़ें :- Swami Vivekananda Jayanti: राष्ट्रीय युवा दिवस पर सभी स्कूलों में सूर्य नमस्कार; CM मोहन का संदेश लाइव होगा