रायगढ़: छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक राजधानी का रुतबा, बहता है 'राम झरना' यहां

रायगढ़ में ही भारत के सबसे बड़े स्पंज आयरन प्लांट में से एक स्थित है. इसके साथ ही रायगढ़ कोसा सिल्क के उत्पादन के लिए भी जाना जाता है. जिले का गठन आजादी के बाद 1 जनवरी 1948 में हुआ था.  उस समय रियासत के राजा ललित सिंह थे.

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छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक राजधानी का रुतबा रखने वाला रायगढ़ जिला सांस्कृतिक, औद्योगिक और हस्तकला के मामले में एक समृद्ध जिले का बेहतरीन उदाहरण है. यहां का रायगढ़ घराना, कत्थक और शास्त्रीय संगीत में अपने योगदान के लिए जाना जाता है. रायगढ़ में ही भारत के सबसे बड़े स्पंज आयरन प्लांट में से एक स्थित है. इसके साथ ही रायगढ़ कोसा सिल्क के उत्पादन के लिए भी जाना जाता है. जिले का गठन आजादी के बाद 1 जनवरी 1948 में हुआ था उस समय रियासत के राजा ललित सिंह थे. जिले के धरमजयगढ़ में बिरहोर जनजाति रहती है, जिन्हें विशिष्ट जनजाति माना जाता है.

राजा चक्रधर की स्मृति में चक्रधर समारोह

रायगढ़ एतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से देश के समृद्ध जिलों में शुमार है.

सांस्कृतिक कार्यक्रमों के कारण यह जिला प्रमुख पर्यटन केंद्र भी है.

स्पंज आयरन प्लांट

रायगढ़ शहर से 8 किमी दूर जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड स्थित है, जो भारत के सबसे बड़े स्पंज आयरन प्लांट्स में से एक है. इसके अलावा यहां पचास से ज्यादा औद्योगिक इकाइयां है जिसके कारण यह जिला औद्योगिक केंद्र बन चुका है. जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड के अलावा, सिंगाल इंटरप्राइजेज, नालवा स्टील एंड पावर लिमिटेड, अंजनी स्टील प्राइवेट लिमिटेड और शिवशक्ति प्राइवेट लिमिटेड जैसे ढेरों कंपनियां यहां हैं.

श्रीराम के तीर से हुआ है राम झरना का निर्माण

शहर से 20 किमी दूर स्थित राम झरना लोकप्रिय पर्यटन केंद्र है जो अपनी पौराणिक महत्व के लिए जाता जाता है. वाल्मीकि रामायण के अनुसार श्रीराम ने 14 साल के वनवास में दस वर्ष का समय दंडकारण्य यानी छत्तीसगढ़ में बिताए थे.

माना जाता है कि वनवास के दौरान जब राम, लक्ष्मण और सीता के साथ यहां पहुंचे तो माता सीता को प्यास लगी थी. तब भगवान राम ने अपने तीर से धरती को भेद कर पानी निकाला था. तब से वहां जल की धारा बह रही है. इसलिए इसे राम झरना कहा जाता है.

रायगढ़ जिला एक नजर में 

  • क्षेत्रफल- 6527  वर्ग किमी
  • जनसंख्या- 1493984
  • साक्षरता दर – 71 %
  • विधानसभा- 5
  • विकासखंड - 9
  • गांव - 1445