Ajit Pawar Death: सहकारिता संस्था से लेकर डिप्टी सीएम तक... जानें, कैसे महाराष्ट्र के सबसे पावरपुल नेता बने अजित पवार?

Ajit Pawar Death: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और NCP प्रमुख अजित पवार का प्लेन बारामती एयरपोर्ट पर आपातकालीन लैंडिंग के प्रयास के दौरान क्रैश हो गया. इस हादसे में उनकी मौत हो गई है. 

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Maharashtra Deputy CM Ajit Pawar Death: महाराष्ट्र की राजनीति के प्रभावशाली नेता और प्रदेश के उप मुख्यमंत्री अजित पवार का आज निधन हो गया है. प्लेन हादसे में हुई उनकी मौत के बाद न केवल महाराष्ट्र में शोक की लहर दौड़ गई. आइए जानते हैं इनके बारे में... 

पहले जानते हैं अजित पवार के डिप्टी सीएम कार्यकाल:

10 नवंबर 2010 - 25 सितंबर 2012, मुख्यमंत्री: पृथ्वीराज चव्हाण

25 अक्टूबर 2012 - 26 सितंबर 2014, मुख्यमंत्री: पृथ्वीराज चव्हाण

23 नवंबर 2019 - 26 नवंबर 2019., मुख्यमंत्री: देवेंद्र फडणवीस

30 दिसंबर 2019 - 29 जून 2022, मुख्यमंत्री: उद्धव ठाकरे

2 जुलाई 2023 - वर्तमान, मुख्यमंत्री: एकनाथ शिंदे / देवेंद्र फडणवीस सरकार

अभी वे दिसंबर 2024 से देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में एकनाथ शिंदे के साथ महाराष्ट्र के 8वें उप मुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत थे.

कौन हैं अजित पवार?

अजित अनंतराव पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के देवलाली प्रवरा गांव  हुआ था. वे वह एनसीपी प्रमुख शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार के बेटे हैं. उनके पिता , मुंबई (तब बॉम्बे) में प्रसिद्ध  राजकमल स्टूडियो में काम करते थे. पिता की मौत के बाद उनके पढ़ाई-लिखाई कम हो गई. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा देओली प्रवर से की और माध्यमिक शिक्षा महाराष्ट्र शिक्षा बोर्ड से पूरी की. 

जानिए इनका राजनीतिक सफर ?

अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार के राजनीतिक नक्शेकदम पर चलते हुए राजनीति में प्रवेश किया. जनता और समर्थकों के बीच वह ‘दादा' के नाम से लोकप्रिय रहे हैं. अजित पवार साल 1982 में जब महज 20 साल के थे, तब उन्होंने  राजनीति की शुरुआत की.उन्होंने सबसे पहले एक चीनी सहकारी संस्था का चुनाव लड़ा था. 

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लगातार वे पदों पर बने रहे 

साल 1991 में वे पुणे जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष बने, 16 साल तक इस पद पर रहे. 

1991 को वे बारामती से लोकसभा के लिए चुने गए, लेकिन अपने चाचा शरद पवार के लिए सीट छोड़ दी. उसी वर्ष महाराष्ट्र विधानसभा के लिए चुने गए. 

1992-1993: कृषि और बिजली राज्य मंत्री बने.

साल 1995, 1999, 2004, 2009 और 2014 में बारामती निर्वाचन क्षेत्र से वह लगातार जीतते रहे. 

महाराष्ट्र की राजनीति में अजीत पवार महत्वाकांक्षी और प्रभावशाली नेता माने जाते हैं. साल 2009 के विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने उप मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जताई थी, लेकिन उस समय यह पद छगन भुजबल को मिला.  हालांकि साल नवंबर 2010 से सितंबर 2012 तक वे उप मुख्यमंत्री रहे. इसके बाद दिसंबर 2012 से सितंबर 2014 उप मुख्यमंत्री (वित्त, योजना और ऊर्जा) के पद पर रहे.   

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वर्ष 2019 को अजित पवार ने अपने चाचा और पार्टी संरक्षक शरद पवार के खिलाफ अपनी पहली खुली बगावत दिखाई. उन्होंने देवेन्द्र फड़नवीस को सीएम बनाने के बीजेपी के साथ अप्रत्याशित गठबंधन किया और खुद उपमुख्यमंत्री बन गए. लेकिन उन्होंने तीन दिन बाद इस्तीफा दे दिया और बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार से समर्थन वापस ले लिया था.       

दिसंबर 2019 में अजित पवार अपने चाचा के साथ वापस आ गए और उद्धव ठाकरे के महा विकास अघाड़ी गठबंधन के नेतृत्व में उपमुख्यमंत्री के रूप में सरकार में फिर से शामिल हो गए. लेकिन जुलाई 2023 में महा विकास अघाड़ी सरकार के पतन के बाद अजीत पवार ने एक बार फिर अपने चाचा के खिलाफ विद्रोह किया था. इससे उनकी पार्टी में विभाजन हो गया और वे भाजपा-एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना सरकार में शामिल हो गए. वे दिसंबर 2024 से देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में एकनाथ शिंदे के साथ महाराष्ट्र के 8वें उप मुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत थे.

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