‘सुर’ कलाकारों की अनसुनी आवाज को सुनती एक शॉर्ट फिल्म

Bollywood News: मुंबई की चॉलों और लोकल ट्रेनों की रोजमर्रा की जिंदगी में रची बसी सुर संदीप नामक एक गायक की कहानी है, जिसके लिए संगीत कोई विकल्प नहीं बल्कि जीवन की आवश्यकता है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
bollywood news

Bollywood News: कलाकार और कोरियोग्राफर पोनी वर्मा (Pony Verma) द्वारा प्रस्तुत सुर (Sur) एक संवेदनशील और ईमानदार शॉर्ट फिल्म है, जो मंच और तालियों से परे एक कलाकार के जीवन की खामोश जिजीविषा, असुरक्षा और भावनात्मक सच्चाई को उजागर करती है. मैंगो करी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किंग्स ऑफ़ बॉलीवुड और वॉनक्रू के सहयोग से निर्मित इस फिल्म का निर्देशन अभय चोपड़ा ने किया है. फिल्म का निर्माण मैंगो करी फ़िल्म्स के संस्थापक शमशाद खान और निलेश नानावरे तथा शिवम गुप्ता ने किया है.

संगीत कोई विकल्प नहीं

मुंबई की चॉलों और लोकल ट्रेनों की रोजमर्रा की जिंदगी में रची बसी सुर संदीप नामक एक गायक की कहानी है, जिसके लिए संगीत कोई विकल्प नहीं बल्कि जीवन की आवश्यकता है. वह अपने पिता के साथ रहता है, जो कभी एक जुनूनी चित्रकार थे लेकिन अब आधे अंधे और टूट चुके हैं. संदीप समाज की अपेक्षाओं और अपने भीतर की उस पुकार के बीच फंसा है, जो कभी शांत नहीं होती. जैसे जैसे रोजी रोटी कमाने का दबाव बढ़ता है, संदीप को बार बार एक कठोर सच्चाई सुनाई देती है कि आर्ट से पेट नहीं भरता. पिता की हताशा उस समय चरम पर पहुंच जाती है जब वे संदीप को संगीत का अभ्यास करने से रोक देते हैं और उसका हारमोनियम बेच देते हैं, जिससे युवा कलाकार गहरे भावनात्मक अकेलेपन और निराशा में डूब जाता है. इसके बाद फिल्म गरिमा, मान्यता और उन नाज़ुक पलों की एक शांत लेकिन प्रभावशाली पड़ताल करती है, जो किसी कलाकार को जीवित रखते हैं. दिब्येंदु भट्टाचार्य और रोशन राजेश चौहान अभिनीत सुर में संयमित और यथार्थपरक अभिनय देखने को मिलता है, जो समझौते, दबे हुए सपनों और अनकहे दर्द से गढ़ी जिंदगियों को प्रतिबिंबित करता है. फिल्म जीविका और आत्म अभिव्यक्ति के बीच की रेखा को धीरे धीरे धुंधला करती है और सवाल उठाती है कि क्या कला को कभी पहचान से अलग किया जा सकता है.

गहराई से जुड़ी

फिल्म से अपने जुड़ाव पर बात करते हुए पोनी वर्मा ने कहा कि सुर उनसे गहराई से जुड़ी हुई है. उन्होंने कहा कि परदे के पीछे अनुशासन, संवेदनशीलता और वह खामोश जिजीविषा होती है, जो हर ईमानदार कहानी को आकार देती है. सुर इस अनदेखी दुनिया को दुर्लभ प्रामाणिकता के साथ प्रस्तुत करती है. यह कलाकार के जीवन को समझती है, जहां संगीत, गति और भावना प्रदर्शन नहीं बल्कि सत्य की भाषा बन जाते हैं. सुर को प्रस्तुत करना मेरे लिए बेहद निजी है, क्योंकि यह उन कलात्मक यात्राओं का प्रतिबिंब है, जिन्हें मैंने अपने आसपास देखा है. ईमानदारी, मूल्य और शिल्प के प्रति अडिग प्रतिबद्धता से प्रेरित कहानियां. यह फिल्म सृजन की आत्मा को सच्ची श्रद्धांजलि है, इसी वजह से यह मेरे लिए विशेष महत्व रखती है.

यह भी पढ़ें : 'Vvan' में पहली बार नजर आएगी सिद्धार्थ-तमन्ना की जोड़ी, झलक आई सामने

Topics mentioned in this article