Subhash Ghai Latest: दिग्गज फिल्ममेकर सुभाष घई (Subhash Ghai ) के नेतृत्व वाली मुक्ता आर्ट्स फिल्म स्टूडियो ने एक अनोखी पहल की घोषणा की है, जिसके तहत लेखकों को अपनी कहानी के विचार सिर्फ दो पन्नों में प्रस्तुत (पिच) करने के लिए आमंत्रित किया गया है. यह पहल सुभाष घई की उस विरासत को आगे बढ़ाती है, जिसके तहत उन्होंने हमेशा नई प्रतिभाओं को खोजने और उन्हें मंच देने का काम किया है.
लॉन्च करने के लिए
जैकी श्रॉफ और माहिमा चौधरी जैसे सितारों को इंडस्ट्री में लॉन्च करने के लिए मशहूर मुक्ता आर्ट्स अब अपनी इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए लेखकों पर फोकस कर रहा है. इस पहल के माध्यम से स्टूडियो उभरते हुए लेखकों को प्रोत्साहित कर रहा है कि वे अपनी मौलिक और दमदार कहानियों को संक्षिप्त और प्रभावशाली तरीके से सामने रखें. इस पहल के केंद्र में एक सरल लेकिन सशक्त विचार है. अच्छी कहानियों को लंबाई की नहीं, प्रभाव की जरूरत होती है. सुभाष घई ने इंस्टाग्राम पर इस बारे में लिखा कि मुक्ता आर्ट्स प्रोडक्शंस लेखकों से अपील करता है कि वे अपनी कहानियों को केवल दो पन्नों में पिच करें, ताकि यदि विचार दमदार हो, तो तुरंत उससे जुड़ा जा सके। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लेखक अपनी कहानी का कॉपीराइट रजिस्ट्रेशन के साथ सबमिशन करें.
प्रतिभा हर जगह मौजूद
इस विजन को आगे बढ़ाते हुए सुभाष घई ने कहा कि मुक्ता आर्ट्स में हम हमेशा मानते हैं कि प्रतिभा हर जगह मौजूद है, उसे बस सही मंच और सही आवाज की जरूरत होती है. आज हम ऐसे लेखकों की तलाश में हैं, जो अपने विचारों की स्पष्टता और ताकत से हमें चौंका सकें. एक सशक्त कहानी, जो सरलता से कही जाए, वह दूर तक जाती है और लंबे समय तक याद रहती है. यह पहल कई तरह के फॉर्मेट्स में कहानियों को आमंत्रित करती है, जिनमें शामिल हैं:
छोटे बजट की हाई-कॉन्सेप्ट फिल्में
म्यूजिक, ड्रामा और सस्पेंस आधारित हिंदी OTT सीरीज
एनिमेटेड एक घंटे की फीचर फिल्में
मिड-बजट लाइव-एक्शन फिल्में
थिएटर्स के लिए हाई-बजट साइ-फाई प्रोजेक्ट्स
नए विचारों को सामने लाना
विभिन्न फॉर्मेट्स के लिए इस खुले आमंत्रण के जरिए मुक्ता आर्ट्स का उद्देश्य विविध कहानियों और नए विचारों को सामने लाना है, जो थिएटर और डिजिटल प्लेटफॉर्म दोनों पर प्रभावी रूप से प्रस्तुत किए जा सकें. पिछले कई दशकों से मुक्ता आर्ट्स ने न सिर्फ कलाकारों को मंच दिया है, बल्कि प्रभावशाली सिनेमा को भी समर्थन दिया है. अब इस नई पहल के जरिए सुभाष घई एक बार फिर दरवाजे खोल रहे हैं. इस बार लेखकों के लिए, ताकि उनकी कहानियां सुनी जाएं, पहचानी जाएं और बड़े पर्दे तक पहुंच सकें.
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