शंकर महादेवन ने रचनात्मक स्वतंत्रता की अपनी अपील को ‘गूंगूनालो’ के लॉन्च से जोड़ा

Shankar Mahadevan Latest: संगीत को किसी उत्पाद की तरह बनाया नहीं जा सकता, महादेवन ने कहा कि जिस पल आप भावना से पहले सफलता की गणना करने लगते हैं, उसी पल कुछ बेहद जरूरी खो जाता है.

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Shankar Mahadevan Latest: पद्म श्री और ग्रैमी पुरस्कार विजेता शंकर महादेवन (Shankar Mahadevan) ने भारतीय संगीत में ईमानदारी और रचनात्मक स्वतंत्रता की अपनी लंबे समय से चली आ रही अपील को ‘गूंगूनालो' के लॉन्च से जोड़ा है. यह एक कलाकार-स्वामित्व वाला मंच है, जो 16 जनवरी को लाइव होने जा रहा है. महादेवन, जो लगातार संगीतकारों पर गति, फॉर्मेट और व्यावसायिक प्रणालियों के दबाव की बात करते रहे हैं, ने कहा कि यह मंच उन जगहों की कमी का जवाब है, जहाँ

बिना जल्दबाजी या डर के संगीत रचा जा सके

संगीत को किसी उत्पाद की तरह बनाया नहीं जा सकता, महादेवन ने कहा कि जिस पल आप भावना से पहले सफलता की गणना करने लगते हैं, उसी पल कुछ बेहद जरूरी खो जाता है. जहां सिनेमा ने भारतीय संगीत को विस्तार और पहुंच दी है, वहीं शंकर महादेवन ने यह भी कहा कि इसने समय-सीमा, ब्रीफ और कथा संबंधी मांगों जैसी अदृश्य संरचनाएं भी थोप दी हैं, जिनमें चिंतन-आधारित या गैर-फिल्मी रचनाओं के लिए बहुत कम जगह बचती है. जो गीत धीरे-धीरे या सहज रूप से रचे जाते हैं, उन्हें अक्सर मंच नहीं मिल पाता.
कुछ गीत ऐसे होते हैं जिन्हें हम सालों तक अपने साथ लेकर चलते हैं. उन्होंने कहा कि इसलिए नहीं कि वे अच्छे नहीं हैं, बल्कि इसलिए कि उनके लिए कोई जगह नहीं थी. यही वह जगह है. गूंगूनालो की कलाकार-स्वामित्व वाली संरचना उस लगातार बने असंतुलन को दूर करने की कोशिश करती है, जिसके बारे में महादेवन कहते रहे हैं कि जहां कलाकारों से बिना स्वामित्व या नियंत्रण दिए, उद्यमी की तरह सोचने की अपेक्षा की जाती है.

लगातार व्यवसायी की तरह

कलाकार व्यवसायी बनने की ट्रेनिंग के साथ नहीं आते. उन्होंने कहा कि फिर भी हमसे लगातार व्यवसायी की तरह सोचने को कहा जाता है, बिना हमें नियंत्रण दिए. गूंगूनालो के सीईओ शर्ली सिंह ने कहा कि इस मंच को उसी सोच को पलटने के लिए डिज़ाइन किया गया है. हम नहीं चाहते थे कि कलाकार किसी मंच में खुद को फिट करें. हम ऐसा मंच बनाना चाहते थे जो कलाकार के अनुरूप हो, जहां सृजन में जल्दबाजी न हो, अधिकार कमजोर न हों और सहयोग लेन-देन तक सीमित न रहे. उन्होंने कहा कि महादेवन ने यह भी जोर देकर कहा कि श्रोताओं की सार्थक संगीत में रुचि कम नहीं हुई है, बल्कि उन्हें उसके पीछे की प्रक्रिया से दूर कर दिया गया है. 

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