Ranveer Singh Latest: धुरंधर (Dhurandhar) में हमजा के रूप में रणवीर सिंह (Ranveer Singh) और जसकीरत के तौर पर उनकी बैकस्टोरी को लेकर बढ़ती एक्साइटमेंट के बीच, एक बात जो उनके बारे में सबसे अलग है, वो ये कि वो खुद को कभी दोहराते नहीं हैं. हर बार जब वो किसी किरदार में उतरते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे कोई नया एक्टर स्क्रीन पर आ गया है. खिलजी से लेकर मुराद और रॉकी तक, उनकी परफॉर्मेंस सिर्फ कपड़ों या माहौल में अलग नहीं होतीं. वो साइकोलॉजी, रिदम, आवाज और इमोशनल बनावट में भी एकदम अलग होती हैं. यहां पढ़े की क्यों रणवीर सिंह की कोई भी दो परफॉर्मेंस कभी एक जैसी नहीं दिखतीं.
वो अपने साइकोलॉजिकल कोर को बदल देते हैं
पद्मावत का अलाउद्दीन खिलजी पागलपन और सनक से भरा है, जबकि बाजीराव मस्तानी का बाजीराव सम्मान और अटूट प्यार के लिए जीता है. दोनों ही योद्धा हैं पर एक शिकारी जैसा खूंखार है, तो दूसरा मर्यादा और इमोशन्स से भरा हुआ. उनके अंदर की सोच और मकसद एक-दूसरे से बिल्कुल अलग होते हैं.
हर बार एकदम नई बॉडी लैंग्वेज
सिम्बा में संग्राम भालेराव सीना तानकर चलता है और उसमें एक अलग ही मास कॉन्फिडेंस दिखता है. दूसरी तरफ, गली बॉय का मुराद झुके हुए कंधों और झिझक के साथ चलता है, जैसे कोई लड़का दुनिया के सामने खुद को समेट रहा हो. उनके चलने-फिरने का तरीका ही पूरी तरह बदल जाता है.
रिपीट नहीं होता आवाज और डायलॉग बोलने का तरीका
'पद्मावत' में खिलजी की वो भारी और सनकी आवाज, 'रॉकी और रानी की प्रेम कहानी' के रॉकी रंधावा के बिंदास पंजाबी अंदाज से कोसों दूर है. यहां तक कि 'लेडीज वर्सेस रिकी बहल' में रिकी बहल की आवाज में एक चिकनी और सोची-समझी चमक है, उन्होंने हर किरदार के लिए अपनी आवाज को बिल्कुल अलग तरीके से ढाला है. किरदार के हिसाब से बदल जाती है. खिलजी का वो खतरनाक और जबरदस्त अंदाज, बाजीराव की शांत गहराई और मुराद की अंदरूनी आग से बिल्कुल अलग है. वह कभी भी एक जैसी एनर्जी लेकर नहीं चलते बल्कि हर रोल के हिसाब से उसे सेट करते हैं.
इमोशन्स दिखाने का तरीका भी हर बार अलग होता है
'बाजीराव मस्तानी' में बाजीराव का प्यार एक गंभीर और शाही अंदाज वाला है, जबकि 'रॉकी और रानी की प्रेम कहानी' में रॉकी का प्यार मस्ती भरा और बिंदास है. 'गली बॉय' के मुराद की बेबसी एकदम कच्ची और खामोश लगती है, जो 'सिम्बा' के संग्राम के शोर-शराबे वाले बदलाव से बिल्कुल अलग है.
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