'धुरंधर 2' से पहले आने वाली है बॉक्स-ऑफिस सुनामी 'बियॉन्ड द केरल स्टोरी'

Vipul Shah Latest: विपुल अमृतलाल शाह द्वारा निर्मित और विकसित द केरल स्टोरी केवल सफल नहीं थी, बल्कि आधुनिक हिंदी सिनेमा में एक असाधारण घटना साबित हुई.

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Vipul Shah Latest: विपुल शाह (Vipul Shah) की ब्लॉकबस्टर फ्रेंचाइजी बियॉन्ड द केरल स्टोरी, जो फरवरी में रिलीज हो रही है, 2026 के बॉक्स-ऑफिस नैरेटिव को पूरी तरह से बदलने की क्षमता रखती है. जहां हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की ज्यादातर चर्चाएं इस समय 19 मार्च को रिलीज होने वाली धुरंधर 2 के इर्द-गिर्द घूम रही हैं. वहीं उससे ठीक कुछ हफ्ते पहले 27 फरवरी को एक ऐसी फिल्म रिलीज होने जा रही है जो बॉक्स-ऑफिस के सारे समीकरण बदल सकती है बियॉन्ड द केरल स्टोरी. इसे सिर्फ एक और सीक्वल समझना बाजार की वास्तविकताओं को नजरअंदाज करने जैसा होगा.

विरासत का लाभ: पहला भाग, जो एक मिसाल बन गया

विपुल अमृतलाल शाह द्वारा निर्मित और विकसित द केरल स्टोरी केवल सफल नहीं थी, बल्कि आधुनिक हिंदी सिनेमा में एक असाधारण घटना साबित हुई. तमाम ट्रेड अनुमानों को गलत साबित करते हुए, इस फिल्म ने बिना मिडिल ईस्ट रिलीज, सीमित ओवरसीज मौजूदगी और बिना किसी बड़े स्टार के बावजूद, वैश्विक स्तर पर 300 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया. इस उपलब्धि को असाधारण बनाने वाली बात थी, इसका स्केल, कंटेंट और कन्वर्जन. फिल्म ने मल्टीप्लेक्स मेट्रो शहरों से आगे बढ़कर टियर-2, टियर-3 और ग्रामीण इलाकों तक दर्शकों को लगातार आकर्षित किया. पिछले एक दशक में बहुत कम फिल्में बिना पारंपरिक कमर्शियल तत्वों के इतनी स्थायी भीड़ जुटा पाई हैं. यही विरासत बियॉन्ड द केरल स्टोरी 2 को एक मजबूत शुरुआती बॉक्स-ऑफिस आधार देती है, क्योंकि फ्रेंचाइजी पहले ही अपना वफादार दर्शक वर्ग बना चुकी है. रचनात्मक निरंतरता और बढ़ी हुई विश्वसनीयता : इस सीक्वल की सबसे कम आंकी गई ताकत इसकी रचनात्मक टीम है. फिल्म का निर्देशन कमाख्या नारायण सिंह कर रहे हैं, जो दो बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके हैं. उनकी प्रतिष्ठा इस प्रोजेक्ट को गहरी विश्वसनीयता प्रदान करती है. जहां कई सीक्वल अपनी मूल सोच को कमजोर कर देते हैं, वहीं बियॉन्ड द केरल स्टोरी कथित तौर पर रिसर्च-आधारित कहानी कहने को और मजबूत करती है.

रिकॉर्ड यह दर्शाता

इतना ही नहीं, विपुल अमृतलाल शाह न केवल इस फ्रेंचाइजी के निर्माता हैं, बल्कि इसके लेखक भी हैं. उनका ट्रैक रिकॉर्ड यह दर्शाता है कि उन्हें कहानी के प्रभाव और जनमानस की मनोविज्ञान दोनों की गहरी समझ है, जो राजनीतिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील विषयों पर बनी फिल्मों के लिए बेहद जरूरी है.

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