'छोटा भीम' के 18 साल और ढोलकपुर की वो छोटी सी दुनिया, जो कभी हमसे दूर नहीं हुई

Chhota Bheem Latest: जब यह शो 2008 में पोगो पर शुरू हुआ था, तब धीरे-धीरे यह हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया. यह हमारे बड़े होने की यादों के साथ जुड़ गया.स्कूल के बाद की दोपहरें, परिवार के साथ बिताए वीकेंड, और लंबी गर्मी की छुट्टियां जब समय थोड़ा ठहर सा जाता था.

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Chhota Bheem Latest: अठारह साल बाद भी, छोटा भीम (Chhota Bheem) और कई दूसरी दुनियाओं में दौड़ता नजर आता है. आज भी मदद करता है, आज भी सुरक्षा करता है, और जब जरूरत होती है, तब हमेशा सामने आता है. एक ऐसी दुनिया में जो लगातार बदल रही है, भीम ने उसी तरह बने रहकर एक अलग ही जगह बना ली है.

जिंदगी का हिस्सा बन गया

जब यह शो 2008 में पोगो पर शुरू हुआ था, तब धीरे-धीरे यह हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया. यह हमारे बड़े होने की यादों के साथ जुड़ गया.स्कूल के बाद की दोपहरें, परिवार के साथ बिताए वीकेंड, और लंबी गर्मी की छुट्टियां जब समय थोड़ा ठहर सा जाता था. ग्रीन गोल्ड एनीमेशन द्वारा बनाया गया यह शो बिना ज़्यादा कोशिश के अपनी जगह बना गया. इसमें दिखावे पर जोर नहीं था. यह इसलिए काम करता था क्योंकि यह अपना सा लगता था. इस पूरी कहानी के केंद्र में है लड्डू पसंद करने वाला भीम. मजबूत, बहादुर और एक सादगी भरी अच्छाई के साथ. वह खुद को हीरो नहीं कहता. वह बस तब आगे बढ़ता है जब किसी को मदद की जरूरत होती है. चाहे ढोलकपुर को क्रीमादा के खतरे से बचाना हो या किसी दोस्त की छोटी सी मदद करनी हो, उसके हर काम में सच्चाई दिखती है. उसके आसपास एक ऐसा समूह है जो दोस्त से बढ़कर परिवार जैसा लगता है. छुटकी अपने साथ अपनापन और संतुलन लाती है, राजू अपनी उम्र से बढ़कर हिम्मत दिखाता है, जग्गू बंदर अपने मजाक और ऊर्जा से माहौल हल्का करता है, और कालिया, ढोलू-भोलू के साथ मिलकर शरारत का एक रंग जोड़ता है जो इस समूह में बिल्कुल फिट बैठता है. साथ मिलकर ये एक ऐसा तालमेल बनाते हैं जो कहानियों को सच्चा बना देता है.

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हमेशा के लिए जुड़ गए

सालों के दौरान कुछ एपिसोड दर्शकों के साथ हमेशा के लिए जुड़ गए. जैसे द मिस्टेरियस आइलैंड, ढोलकपुर सर्कस, द प्रिंसेस एंड द मैजिकल रिंग, और द हॉन्टेड शिप आज भी याद किए जाते हैं. ये एपिसोड सिर्फ रोमांच तक सीमित नहीं हैं. ये परिचित किरदारों को नई परिस्थितियों में ले जाते हैं, लेकिन उनके रिश्तों को वैसा ही बनाए रखते हैं. चाहे किसी अनजानी चुनौती का सामना करना हो या एक-दूसरे का साथ देना हो, ये कहानियां बार-बार देखने का मन करती हैं.फिल्मों ने इसी एहसास को और आगे बढ़ाया. छोटा भीम: भीम वर्सेस एलियंस, छोटा भीम एंड द कर्स ऑफ दमयान, छोटा भीम एंड द थ्रोन ऑफ बाली, और छोटा भीम हिमालयन एडवेंचर जैसी फिल्मों ने दर्शकों को ढोलकपुर से बाहर भीम को देखने का मौका दिया. बड़ी दुनिया, नए राज्य और मज़बूत खलनायक कहानी को और बड़ा बनाते हैं, लेकिन दिल वही रहता है. भीम की सही और गलत की समझ नहीं बदलती. अपने दोस्तों के साथ उसका रिश्ता नहीं बदलता. यही निरंतरता इन कहानियों को खास बनाती है, चाहे दुनिया कितनी भी बड़ी क्यों न हो जाए.

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