छत्तीसगढ़ में जहां कभी गोलियों की गूंज और खौफ का साया था, उसी सुकमा के ताड़मेटला इलाके से अब बदलाव की तस्वीर सामने आ रही है. यही वह इलाका है, जहां साल 2010 में CRPF के 76 जवान शहीद हुए थे और फिर साल 2012 में सुकमा जिले के पहले कलेक्टर IAS एलेक्स पॉल मेनन का नक्सलियों ने अपहरण कर लिया था. वर्षों तक दहशत और अलगाव का प्रतीक रहा यह गांव अब पहली बार प्रशासन की सीधी पहुंच देख रहा है.
ताड़मेटला में पहली बार गांव तक पहुंचा सिस्टम
नक्सली हमले के लिए सुर्खियों में गांव ताड़मेटला कभी नक्सल प्रभाव का मजबूत गढ़ माना जाता था, वहां अब सुकमा जिला प्रशासन खुद पहुंचकर हालात बदलने की कोशिश कर रहा है. सुकमा के वर्तमान जिला कलेक्टर IAS अमित कुमार और एसपी IPS किरण चव्हाण ने घने जंगलों और जोखिम भरे रास्तों को पार कर गांव तक पहुंच बनाई.
उनके साथ CRPF के डीआईजी आनंद सिंह पुरोहित और जिला पंचायत CEO मुकुंद ठाकुर भी मौजूद रहे. इस दौरे को सिर्फ एक विजिट नहीं, बल्कि “सरकार गांव के द्वार” की असली तस्वीर माना जा रहा है.
ताड़मेटला में कलेक्टर-एसपी ने लगाई चौपाल
गांव ताड़मेटला में सुकमा डीएम IAS अमित कुमार और एसपी IPS किरण चव्हाण ने गांव में चौपाल लगाकर लोगों से सीधे संवाद किया. ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और कई मुद्दों पर मौके पर ही समाधान की दिशा तय की. ग्रामीणों के लिए यह पहली बार था जब उन्होंने प्रशासन को अपने बीच बैठकर बात करते देखा. लंबे समय से अलग-थलग पड़े इस गांव में यह दृश्य भरोसा लौटने का संकेत माना जा रहा है.
ताड़मेटला के विकास को लेकर बड़े फैसले
पहली बार पहुंचे सुकमा जिला कलेक्टर अमित कुमार ने ताड़मेटला के विकास के लिए प्राथमिक शाला, आंगनबाड़ी और पंचायत भवन निर्माण के लिए 45 लाख रुपये की मंजूरी दी गई. काम में देरी न हो, इसके लिए 15 लाख रुपये की अग्रिम राशि भी पंचायत के खाते में ट्रांसफर कर दी गई. ग्रामीणों की सबसे बड़ी जरूरत पेयजल को देखते हुए अधिकारियों ने एक सप्ताह के भीतर हर घर तक पानी पहुंचाने का भरोसा दिया. बताया गया कि पाइपलाइन का काम लगभग पूरा हो चुका है.
इसके साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना, वृद्धा पेंशन, महतारी वंदन योजना, तेंदूपत्ता खरीदी, बिजली और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई. प्रशासन ने साफ संकेत दिया कि अब यह गांव विकास की मुख्यधारा से दूर नहीं रहेगा.
ताड़मेटला वही जमीन है, जो कभी देश के सबसे बड़े नक्सली हमलों और प्रशासन के खिलाफ बड़ी घटनाओं की गवाह रही है. ऐसे में उसी गांव में प्रशासन की सीधी मौजूदगी को एक बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. यह सिर्फ विकास कार्यों की शुरुआत नहीं, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सरकार की मजबूत मौजूदगी और भरोसा लौटने की कहानी भी है.