ACB Action Surajpur: सूरजपुर जिले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की एक बड़ी कार्रवाई के ठीक अगले दिन राजस्व विभाग में हुए व्यापक फेरबदल ने प्रशासनिक हलकों से लेकर आम लोगों तक में चर्चा तेज कर दी है. प्रतापपुर तहसील के संधोपारा में पदस्थ पटवारी को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े जाने के बाद कलेक्टर द्वारा एक साथ 106 पटवारियों और 9 राजस्व निरीक्षकों का तबादला आदेश जारी किया गया. भले ही इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया बताया जा रहा हो, लेकिन इसके समय और परिस्थितियों को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं.
ACB की कार्रवाई से मचा था हड़कंप
प्रतापपुर तहसील में तैनात पटवारी सौरभ गोस्वामी को ACB ने 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था. शिकायत सामने आने के बाद ACB ने पहले सत्यापन किया और फिर ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया. आरोप है कि पटवारी ने नामांतरण और नौकरी से जुड़े प्रतिवेदन के बदले घूस की मांग की थी. इस कार्रवाई ने एक बार फिर जिले के राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में ला खड़ा किया.
अगले ही दिन बड़े पैमाने पर तबादले
ACB की कार्रवाई के महज एक दिन बाद कलेक्टर एस. जयवर्धन ने राजस्व विभाग में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी करते हुए 106 पटवारियों और 9 राजस्व निरीक्षकों (RI) के तबादले का आदेश जारी कर दिया. एक साथ इतनी बड़ी संख्या में तबादला सूची जारी होना अपने आप में असामान्य माना जा रहा है. आदेश जारी होते ही यह सवाल उठने लगे कि क्या यह महज संयोग है या फिर भ्रष्टाचार के बाद उठाया गया त्वरित प्रशासनिक कदम.
ACB Action: राजस्व विभाग तबादला
लंबे समय से जमे थे कर्मचारी
सूत्रों के मुताबिक, तबादला सूची में शामिल अधिकांश पटवारी और RI तीन साल से अधिक समय से एक ही स्थान पर पदस्थ थे. प्रशासनिक नियमों के अनुसार लंबे समय तक एक ही जगह तैनाती को अनुचित माना जाता है. इसी आधार पर प्रशासन इसे नियमित प्रक्रिया बता रहा है, लेकिन ACB कार्रवाई के तुरंत बाद आदेश जारी होने से संदेह और गहराता जा रहा है.
पहले भी घिरी रही है राजस्व व्यवस्था
यह पहली बार नहीं है जब सूरजपुर जिले में राजस्व कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हों. इससे पहले भी ACB द्वारा पटवारियों और अन्य राजस्व कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है. हाल ही में एक पटवारी और एक क्लर्क को रिश्वत लेते पकड़े जाने की घटना ने विभाग की छवि को खासा नुकसान पहुंचाया था.
समय और मंशा पर सवाल
तबादला आदेश को लेकर चर्चा यह भी है कि क्या यह आदेश पहले से लंबित था या ACB की कार्रवाई के बाद आनन-फानन में जारी किया गया. कुछ सूत्रों का दावा है कि यह आदेश बैक डेट में निकालकर प्रशासन ने खुद को विवाद से दूर रखने की कोशिश की है. हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
चर्चा के केंद्र में आदेश
फिलहाल यह तबादला आदेश जिले में चर्चा और सवालों के केंद्र में है. क्या यह भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की ठोस कोशिश है, या फिर बढ़ते दबाव के बीच की गई एक प्रशासनिक कवायद, इसका जवाब आने वाला समय देगा. लेकिन इतना तय है कि ACB की कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग की हर गतिविधि अब गहन निगरानी में है.
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