Sukma Tribal Family Painful Story: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के तोंगपाल कुम्मा कोलेंग गांव से बेहद दर्द भरी तस्वीर निकलकर सामने आई है. इस गांव के रहने वाले बामन मंडावी को कृश्चिन होने की बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है. कृश्चिन होने के साथ वो कुष्ठ रोग से पीड़ित है. इस रोग के कारण गांव के लोगों ने फैसला कर बेदखल कर दिया. पंचायत के इस फैसले के बाद बामन का पूरा जीवन ही नरक हो गया है.
बच्चों की छूट गई पढ़ाई
बामन के दोनों बच्चे पढ़ाई से वंचित हो गए. एक मासूम जूते चप्पल की दुकान पर काम करने जाता है और दूसरा मसूम पिता के साथ भीख मांगता है. इतना ही नहीं कभी कभी इन तीनों को भूखा ही सोना पड़ता है.
बामन कहते हैं कि गांव वापस नहीं लौट सकते हैं. यदि गांव गए तो वहां लोग पीट-पीट कर भगा देंगे. पंचायत की बैठक में यह फैसला लिया गया कि मौत के बाद कौन छुएगा. पत्नी बीमारी के चलते तीन साल पहले मर चुकी है. जिस रोग से जूझ रहा हूं, इससे अगर मौत अचानक हो गई तो दोनों बच्चे कहां जाएंगे... चिंता सताती है?
एक माह से सड़क किनारे जीवन यापन, बच्चों ने त्रिपाल से तैयार की झोपड़ी
दंतेवाड़ा के पतार्रास में पिछले एक माह से वह झोपड़ी में रह रहा है. बामन बताता है कि वह कुछ करने लायक नहीं है. यह झोपड़ी बच्चों ने किसी तरह से बनाई है. एक बच्चे को जो पैसा मिलता है, उसी से जीवन यापन हो रहा है. छोटा बच्चा और मैं भीख मांगते है. इसी तरह जीवन की कहानी चल रही है. पढ़ाई तो दोनों बच्चों की छूट ही चुकी है.
यह घर भी नहीं बचेगा, फॉरेस्ट विभाग कह रहा हटो यहां से, कही भी जाओ
इस परिवार पर दुखों ने तो स्थाई घर बना लिया है. यदि स्थाई घर नहीं है तो सिर्फ बामन का... अब वह जहां रह रहा है, वहां से भी वन विभाग हटने की चेतावनी दे रहा है.
बामन कहता है कि फॉरेस्ट विभाग मारपीट कर भागने की बात कह रहा है. यदि ऐसा हुआ तो वह कहां जाएगा? सुकमा से पंचायत ने भगा दिया... यहां से वन विभाग हटने के लिए कह रहा है. अब बामन के परिवार के लिए बड़ा सवाल यह है कि आखिर वह जाए तो जाए कहां? सिस्टम क़ी बेरुखी ने बामन के जीवन को हासिये पर रख दिया है.