Success Story UPSC: छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए रायगढ़ जिले का एक छोटा सा गांव 'संबलपुरी' आज प्रेरणा का केंद्र बन गया है. यहां के एक साधारण किसान परिवार के बेटे अजय गुप्ता ने अपनी असाधारण मेहनत से संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की भारतीय वन सेवा (IFoS) परीक्षा 2025 में अखिल भारतीय स्तर पर 91वीं रैंक हासिल की है. अजय की इस उपलब्धि ने साबित कर दिया है कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो संसाधनों की कमी कभी बाधा नहीं बनती.
वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने दी बधाई
अजय की इस गौरवशाली सफलता की जानकारी छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री और रायगढ़ विधायक ओपी चौधरी (पूर्व IAS) ने सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की. उन्होंने अजय को बधाई देते हुए लिखा कि सीमित संसाधनों के बावजूद कड़ी मेहनत, लगन और अनुशासन से प्राप्त यह मुकाम छत्तीसगढ़ के अन्य युवाओं को नई ऊर्जा देगा. मंत्री चौधरी ने अजय के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उनकी सफलता को प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है.
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पहले CSE में पाई AIR 452
अजय गुप्ता की यह सफलता कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि उनकी निरंतर तपस्या का फल है. इससे पहले भी उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय देते हुए UPSC सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2025 में 452वीं रैंक हासिल की थी. अब भारतीय वन सेवा में 91वीं रैंक लाकर उन्होंने अपनी योग्यता को एक नए शिखर पर पहुंचा दिया है. ऐसे में महज एक साल में ही अजय गुप्ता ने दो बार यूपीएससी की परीक्षा पास करके इतिहास रच दिया.
UPSC IFoS परीक्षा परिणाम एक नजर में
संघ लोक सेवा आयोग द्वारा शुक्रवार को जारी परिणामों के अनुसार, इस प्रतिष्ठित सेवा के लिए देशभर से कुल 148 उम्मीदवारों का चयन किया गया है. लिखित परीक्षा पिछले वर्ष नवंबर में आयोजित की गई थी, जिसके बाद अप्रैल 2025 में साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी हुई. चयनित 148 उम्मीदवारों में से 42 सामान्य वर्ग, 52 अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), 22 अनुसूचित जाति (SC), 21 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), 11 अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग से हैं.
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भिलाई की सुष्मिता सिंह को 32वीं रैंक
रायगढ़ के अजय गुप्ता के साथ-साथ भिलाई की सुष्मिता सिंह ने भी इस परीक्षा में छत्तीसगढ़ का डंका बजाया है. सुष्मिता ने देशभर में 32वीं रैंक हासिल कर भारतीय वन सेवा (IFS) में अपनी जगह बनाई है. बीटेक करने के बाद सुष्मिता ने एक अच्छी-खासी नौकरी छोड़ दी थी ताकि वे अपने सपनों को पूरा कर सकें. लगातार पांच बार असफल होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने छठे प्रयास में यह बड़ी सफलता हासिल की. उनकी यह यात्रा "हार न मानने" के जज्बे की एक बेहतरीन कहानी है.
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