छत्तीसगढ़ में कोरिया जिले के ग्राम पंचायत सलका में करोड़ों की लागत से बन रहा स्टेडियम पांच साल बाद भी अधूरा पड़ा हुआ है. बजट की कमी के कारण ही निर्माण कार्य बीच में रुक गया है, जिसके चलते मैदान की स्थिति पूरी तरह खराब हो चुकी है. मैदान का एक हिस्सा सात से दस फीट गहरी खाई में बदल गया है, जबकि पूरे परिसर में झाड़ियां और जंगल जैसी स्थिति हो गई है.
बीचोबीच गौशाला बना दिए जाने से खिलाड़ियों को खेल सुविधा मिलना तो दूर, अब यह जगह मवेशी पालने का अड्डा बन गई है. ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि अधूरे स्टेडियम का निर्माण जल्द पूरा किया जाए, ताकि युवाओं को खेल के लिए उचित मैदान उपलब्ध हो सके.
चौकीदार पालते हैं गायें
चौकीदार संतोष ने साफ कहा कि मैदान में जो गायें बंधी हैं, वे उनकी ही हैं और वही यहां पर उन्हें पालते हैं. उनका कहना है कि इस मैदान में कोई खेलने आता ही नहीं है क्योंकि यह अब खेलने लायक बचा ही नहीं है. संतोष का कहना है कि वे केवल गाय पालते हैं और इसके अलावा कुछ नहीं करते. वहीं, स्थानीय युवाओं ने भी स्टेडियम की अधूरी हालत पर नाराजगी जताई.
देखकर नहीं लगता है कि करोड़ों खर्च हुए
किशन कुमार ने कहा कि अब तक लगभग तीन करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए हैं, लेकिन यहां आकर देखने से बिल्कुल भी अंदाजा नहीं लगता कि इतना पैसा खर्च हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह स्टेडियम ऐसी जगह बनाया जा रहा है जो बनने लायक ही नहीं थी और इस पूरे प्रकरण में शासन के पैसे का दुरुपयोग हुआ है.
स्टेडियम की हालत बहुत खराब
स्थानीय निवासी सुरेश सिंह का कहना है कि स्टेडियम की हालत बहुत खराब है, चारों ओर जंगल-झाड़ियां उग आई हैं. बड़े-बड़े पत्थर और बोल्डर पड़े हुए हैं और मैदान का एक कोना गहरी खाई में तब्दील हो गया है, तो वहीं स्थानीय युवा सनी ने भी यहां भ्रष्टाचार और लापरवाही का आरोप लगाया. उनका कहना है कि जितनी लागत दिखाई जा रही है, स्टेडियम की हालत देखकर उस पर खर्च हुआ नजर नहीं आता.
2016-17 में शुरू हुआ था निर्माण
आधा-अधूरा पड़ा यह स्टेडियम बच्चों और युवाओं के लिए परेशानी का कारण बन गया है और वे खेलने के लिए खेतों में जाने को मजबूर हैं. वहीं, इस पूरे मामले में लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता आशीष दुबे ने जानकारी दी कि स्टेडियम का निर्माण 2016-17 में शुरू किया गया था. प्रारंभिक चार करोड़ की थी, जिसमें से तीन करोड़ का काम कर लिया गया है और एक करोड़ राशि शेष थी.
उन्होंने कहा कि समस्या यह हुई कि पूर्व में चयनित स्थल बदल दिया गया था और नए स्थल पर ऊंचे रिटेनिंग वॉल की आवश्यकता पड़ी, जिससे खर्च बढ़ गया. इस कारण सात करोड़ रुपए का नया प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिली है. अभियंता दुबे ने यह भी कहा कि वहां किसी प्रकार का दुरुपयोग नहीं हो रहा है, गेट पर ताला लगा हुआ है और कई बार स्थल का निरीक्षण भी किया गया है.