रसोई से बाजार तक का सफर… अब पति की कमाई पर नहीं रहेगी निर्भरता, महिलाओं ने मशरूम से बदली तस्वीर

गरियाबंद के देवभोग क्षेत्र में ग्रामीण महिलाओं ने मशरूम की खेती से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है. अब ये महिलाएं केवल रसोई तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि घर से ही कमाई का जरिया तैयार कर रही हैं. बड़ौदा आरसेटी के प्रशिक्षण से महिलाओं को कम लागत में व्यवसाय शुरू करने का हुनर मिला है.

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Women Mushroom Farming: गरियाबंद जिले के देवभोग इलाके में ग्रामीण महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि अगर अवसर और सही मार्गदर्शन मिले, तो वे अपनी जिंदगी की दिशा बदल सकती हैं. अब ये महिलाएं सिर्फ घर‑गृहस्थी तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि अपनी रसोई से ही कमाई की राह तैयार कर रही हैं. मशरूम की खेती ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का मौका दिया है और अब वे अपने परिवार की आर्थिक मजबूती में भी अहम भूमिका निभा रही हैं.

रूढ़ियों को तोड़ने का साहसिक कदम

ग्रामीण भारत में महिलाओं को अक्सर चूल्हा‑चौके तक सीमित माना जाता है, लेकिन देवभोग के ग्राम कदलीमुड़ा की महिलाओं ने इस सोच को बदलने का फैसला किया. बड़ौदा आरसेटी गरियाबंद द्वारा आयोजित मशरूम खेती प्रशिक्षण ने उन्हें यह अहसास कराया कि वे भी कम लागत में अपना काम शुरू कर सकती हैं और खुद की पहचान बना सकती हैं.

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धान की खेती से हटकर नई सोच

छत्तीसगढ़ के गांवों में परंपरागत रूप से धान की खेती की जाती है, जिसमें ज्यादा जमीन और मेहनत दोनों की जरूरत होती है. लेकिन मशरूम की खेती इससे बिल्कुल अलग है. इसे घर के अंदर, कम जगह और कम रोशनी में भी किया जा सकता है. प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को बताया गया कि कुछ ही दिनों में मशरूम उगाकर अच्छी आमदनी की जा सकती है, वो भी घरेलू कामों के साथ‑साथ.

घर के अंदर ही छोटा कारोबार

महिलाओं को यह जानकर खासा उत्साह मिला कि मशरूम उगाने के लिए उन्हें खेतों में घंटों मेहनत नहीं करनी पड़ेगी. एक छोटा सा कमरा, सही तापमान और नमी बस यही जरूरत है. विशेषज्ञों ने बीज (स्पॉन) तैयार करने से लेकर मशरूम की कटाई तक की पूरी प्रक्रिया आसान भाषा में समझाई.

मुफ्त प्रशिक्षण और सम्मानजनक माहौल

आरसेटी की ओर से प्रशिक्षण पूरी तरह मुफ्त रखा गया. महिलाओं को टी‑शर्ट, कैप और भोजन भी उपलब्ध कराया गया, जिससे उन्हें यह महसूस हुआ कि वे किसी प्रोफेशनल ट्रेनिंग का हिस्सा हैं. प्रशिक्षण में खाद तैयार करना, नमी का संतुलन, कीटों से बचाव और मशरूम की गुणवत्ता बनाए रखने जैसे जरूरी पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी गई.

बाजार तक पहुंचने की तैयारी

सिर्फ उत्पादन ही नहीं, बल्कि मशरूम को सही तरीके से संग्रहित करने और बाजार में बेचने की रणनीति भी महिलाओं को सिखाई गई. किस तरह स्थानीय बाजार में ग्राहक तलाशें और बेहतर दाम प्राप्त करें इस पर भी चर्चा हुई. इससे महिलाओं का आत्मविश्वास और बढ़ा.

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आर्थिक मजबूती से बदलेगा सामाजिक स्वरूप

इस प्रशिक्षण के बाद महिलाएं अब सिर्फ अपने पति की कमाई पर निर्भर नहीं रहेंगी. उन्हें विभिन्न सरकारी ऋण योजनाओं की जानकारी दी गई, जिससे वे अपना छोटा सा व्यवसाय शुरू कर सकें. जब एक महिला आत्मनिर्भर होती है, तो उसका असर पूरे परिवार पर पड़ता है.

समृद्धि की नई पहचान बनता मशरूम

कदलीमुड़ा और आसपास के गांवों की महिलाओं का उत्साह साफ दिखाता है कि वे आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं. गरियाबंद जिले में आरसेटी का यह प्रयास ग्रामीण विकास की दिशा में एक मजबूत कदम है. अब इन महिलाओं की रसोई से सिर्फ खाना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और समृद्धि की खुशबू भी आएगी.

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