Republic Day parade : कर्तव्य पथ पर दिखेगा छत्तीसगढ़ का मुरिया दरबार, जानिए झांकी का विषय और डिजाइन

75th Republic Day of India : छत्तीसगढ़ की झांकी में केंद्रीय विषय "आदिम जन-संसद" के अंतर्गत जगदलपुर के मुरिया दरबार और उसके उद्गम-सूत्र लिमऊ-राजा को दर्शाया गया है. मुरिया दरबार विश्व-प्रसिद्ध बस्तर दशहरे की एक परंपरा है, जो 600 सालों से चली आ रही है.

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Republic Day 2024 : नई दिल्ली के कर्तव्य पथ (Kartavya Path) गणतंंत्र दिवस को लेकर परेड की रिहर्सल (Rehearsal for Republic Day parade) पिछले कई दिनों से की जा रही है. घने कोहरे और कड़कड़ाती ठंड के बीच भी गणतंत्र दिवस परेड की रिहर्सल जारी है. इस साल 26 जनवरी 2024 को देश अपना 75वां गणतंत्र दिवस (75th Republic Day of India) मनाएगा, जिसकी तैयारियां जोरों पर हैं. सुबह-सुबह यहां पर फुल ड्रेस परेड रिहर्सल (Full Dress Parade Rehearsal) के दृश्य देखे जा सकते हैं. गणतंत्र दिवस के मौके पर परेड के साथ ही साथ सबसे रोमांचकारी पल विभिन्न राज्यों की झांकी (Tableau of Various States) का होता है. आइए जानते हैं इस बार छत्तीसगढ़ की झांकी (Tableau of Chhattisgarh) किस विषय पर होगी और इसका डिजाइन कैसा होगा?

गणतंत्र दिवस के दिन कर्तव्य पर छत्तीसगढ़ की यह झांकी दिखेगी
Photo Credit: छत्तीसगढ़ सरकार जनसंपर्क विभाग

"मुरिया दरबार"

नई-दिल्ली स्थित कर्तव्य पथ पर होने वाली परेड के लिए 28 में से 16 राज्यों का चयन किया गया हैइस साल नई दिल्ली में होने वाली गणतंत्र-दिवस परेड के लिए छत्तीसगढ़ की झांकी "बस्तर की आदिम जनसंसद : मुरिया दरबार" को चयनित किया गया है.

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छत्तीसगढ़ की झांकी भारत सरकार की थीम 'भारत लोकतंत्र की जननी' पर आधारित है. यह झांकी जनजातीय समाज में आदि-काल से उपस्थित लोकतांत्रिक चेतना और परंपराओं को दर्शाती है, जो आजादी के 75 साल बाद भी राज्य के बस्तर संभाग में जीवंत और प्रचलित है.

झांकी की थीम व डिजाइन स्थानीय स्तर पर लंबी रिसर्च और वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में तैयार की गई. इस विषय वस्तु पर आधारित झांकी को पांच चरणों की कठिन प्रक्रिया के बाद अंतिम स्वीकृति मिली है. रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) की विशेषज्ञ समिति के सामने थीम और डिजाइन के चयन के बाद झांकी का थ्रीडी मॉडल (3D Model) प्रस्तुत किया गया. अंत में संगीत चयन के साथ ही झांकी को अंतिम स्वीकृति मिल गई. झांकी की थीम और डिजाइन ने सबको खासा आकर्षित किया.

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इस झांकी में केंद्रीय विषय "आदिम जन-संसद" के अंतर्गत जगदलपुर के मुरिया दरबार और उसके उद्गम-सूत्र लिमऊ-राजा को दर्शाया गया है. मुरिया दरबार विश्व-प्रसिद्ध बस्तर दशहरे की एक परंपरा है, जो 600 सालों से चली आ रही है. इस परंपरा के उद्गम के सूत्र कोंडागांव जिले के बड़े-डोंगर के लिमऊ-राजा नामक स्थान पर मिलते हैं. इस स्थान से जुड़ी लोककथा के अनुसार आदिम-काल में जब कोई राजा नहीं था, तब आदिम-समाज एक नींबू को राजा का प्रतीक मानकर आपस में ही निर्णय ले लिया करता था.

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय (Chhattisgarh Chief Minister Vishnu Deo Sai) ने राज्य को मिली इस महत्वपूर्ण सफलता पर बधाई दी है, उन्होंने इसे प्रदेश के लिए एक बड़ा अवसर बताया है. बता दें कि परेड में शामिल होने वाली झांकियों के लिए सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, केंद्रीय मंत्रालय और विभागों से रक्षा मंत्रालय प्रस्ताव मांगता है. इन प्रस्तावों का मूल्यांकन किया जाता है. झांकियों के चयन के लिए विशेषज्ञ समिति के साथ विभिन्न चरणों में कई बैठकें होती हैं. कमेटी में कला, संस्कृति, चित्रकला, मूर्तिकला, संगीत, वास्तुकला के क्षेत्र में प्रतिष्ठित व्यक्ति, कोरियोग्राफर आदि शामिल रहते हैं. विशेषज्ञ समिति थीम के आधार पर प्रस्तावों की जांच करती है. सिफारिशें करने से पहले कमेटी द्वारा अवधारणा, डिजाइन और इसके दृश्य प्रभाव पर ध्यान दिया जाता है.

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