छत्तीसगढ़ में एमसीबी (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर) जिले के प्राथमिक शाला रामानुजनगर की शिक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है. यहां पदस्थ सहायक शिक्षक नीतेश कुमार पांडेय करीब पौने दो वर्षों से बिना किसी पूर्व सूचना के विद्यालय से गायब हैं. हैरानी की बात यह है कि शिक्षा विभाग अब तक सिर्फ नोटिस और पत्राचार तक ही सीमित नजर आ रहा है. मामला तब सामने आया जब जनदर्शन में कलेक्टर से इसकी शिकायत की गई.
शिकायत के बाद खुलासा हुआ कि शिक्षक की लगातार गैरहाजिरी से स्कूल की पढ़ाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होती रही, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया. इसका सीधा नुकसान छोटे बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर पड़ा है. जानकारी के मुताबिक सहायक शिक्षक नीतेश कुमार पांडेय ने 3 अक्टूबर 2023 को स्कूल में ज्वाइनिंग दी थी, लेकिन 20 सितंबर 2024 से वे लगातार स्कूल से अनुपस्थित बताए जा रहे हैं.
एक ही शिक्षक संभाल रहा पूरा स्कूल
सबसे गंभीर बात यह है कि उन्होंने विद्यालय प्रबंधन या शिक्षा विभाग को किसी प्रकार की पूर्व सूचना तक नहीं दी. लंबे समय से शिक्षक के गायब रहने के बावजूद विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है. प्राथमिक शाला रामानुजनगर में लगभग 30 बच्चे पढ़ते हैं और यहां केवल दो शिक्षक ही तैनात हैं. ऐसे में एक शिक्षक के लगातार गायब रहने से पूरे स्कूल का भार एकमात्र शिक्षक पर आ गया. एक ही शिक्षक को सभी कक्षाओं के बच्चों को संभालना पड़ रहा है, जिससे पढ़ाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है.
दिसंबर 2024 में जारी हुआ था पहला नोटिस
मामले को गंभीर मानते हुए तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने 30 दिसंबर 2024 को संबंधित शिक्षक को नोटिस जारी किया था. नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशानुसार यदि कोई शासकीय सेवक एक माह या उससे अधिक समय तक अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहता है तो उसकी अनुपस्थिति को सेवा व्यवधान माना जाएगा. शिक्षक को सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने और मेडिकल बोर्ड का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए थे.
शिक्षक ने नहीं दिया कोई जवाब
साथ ही यह चेतावनी भी दी गई थी कि जवाब नहीं देने पर सेवा से पृथक करने की कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि नोटिस जारी होने के लंबे समय बाद भी शिक्षक की ओर से कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया और विभाग भी कार्रवाई के नाम पर सिर्फ फाइलें आगे बढ़ाता रहा. वर्तमान विकासखंड शिक्षा अधिकारी विपिन कुमार पांडेय ने भी शिक्षक की लगातार अनुपस्थिति की जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी को भेजी है लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है.
शिक्षक आखिर कहां हैं इसकी भी स्पष्ट जानकारी विभाग के पास नहीं है. अब जिला शिक्षा अधिकारी कार्रवाई की बात जरूर कर रहे हैं, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि जब एक शिक्षक महीनों नहीं बल्कि वर्षों से स्कूल से गायब था तो आखिर शिक्षा विभाग अब तक क्या करता रहा। सवाल यह भी है कि बच्चों की पढ़ाई बर्बाद होने की जिम्मेदारी कौन लेगा और क्या सिर्फ नोटिस जारी कर देना ही विभागीय कार्रवाई माना जाएगा.