राजिम कुंभ कल्प का आज से आगाज, लाखों श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में लगा रहे आस्था की डुबकी

छत्तीसगढ़ के राजिम में माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर राजिम कुंभ कल्प की शुरुआत हो गई है. सुबह 4 बजे से ही त्रिवेणी संगम में श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगा रहे हैं.

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Rajim Kumbh Kalp 2026: श्रद्धा, आस्था और विश्वास का महापर्व राजिम कुंभ कल्प आज से विधिवत रूप से शुरू हो गया है. माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ के राजिम में स्थित त्रिवेणी संगम पर सुबह 4 बजे से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. देश‑विदेश से लाखों श्रद्धालु इस पुण्य अवसर पर संगम में डुबकी लगाने राजिम पहुंच रहे हैं. पहले स्नान के साथ ही कुंभ कल्प का धार्मिक वातावरण पूरी तरह जीवंत हो उठा है, जो पूरे दिन जारी रहेगा.

सुबह 4 बजे से शुरू हुआ संगम स्नान

राजिम कुंभ कल्प के पहले दिन श्रद्धालुओं ने तड़के ही त्रिवेणी संगम में स्नान शुरू कर दिया. ठंड के बावजूद आस्था इतनी प्रबल रही कि सुबह होते‑होते हजारों लोग संगम तट पर पहुंच गए. स्नान के बाद श्रद्धालु भगवान राजीव लोचन और महादेव कुलेश्वरनाथ के दर्शन के लिए मंदिरों की ओर बढ़ते नजर आए. पूरे दिन संगम स्नान और दर्शन का सिलसिला चलता रहेगा.

माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक चलता है मेला

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार राजिम में अनादिकाल से हर वर्ष माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक विशाल मेला आयोजित होता है. इस दौरान श्रद्धालु उसी श्रद्धा और विश्वास के साथ संगम में स्नान करते हैं, जैसी परंपरा देश के अन्य प्रमुख कुंभ स्थलों में देखी जाती है. आज माघ पूर्णिमा के प्रथम स्नान के साथ राजिम कुंभ कल्प की औपचारिक शुरुआत हो गई है.

त्रिवेणी संगम की है विशेष महिमा

राजिम कुंभ कल्प की पहचान इसका त्रिवेणी संगम है, जहां पैरी, सोंढूर और महानदी नदियां एक‑दूसरे से मिलती हैं. संगम के एक तट पर भगवान विष्णु श्री राजीव लोचन विराजमान हैं, जबकि दूसरे तट पर सप्तऋषियों में से एक लोमश ऋषि का प्राचीन आश्रम स्थित है. संगम के मध्य भाग में स्वयं भगवान शिव कुलेश्वरनाथ के रूप में प्रतिष्ठित हैं, जिससे इस स्थान की आध्यात्मिक महत्ता और बढ़ जाती है.

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दर्शन के लिए घंटों लाइन में खड़े श्रद्धालु

वैसे तो राजिम में पूरे साल श्रद्धालुओं का आना‑जाना लगा रहता है, लेकिन कुंभ कल्प के दौरान यहां आने वालों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है. राजीव लोचन और कुलेश्वरनाथ मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को घंटों लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है. बावजूद इसके, चेहरे पर थकान नहीं बल्कि भक्ति और संतोष का भाव साफ नजर आता है.

मोक्ष की कामना लेकर पहुंच रहे श्रद्धालु

श्रद्धा और भक्ति का दूसरा नाम ही भगवान है. जहां श्रद्धा है, वहीं भक्ति है और जहां भक्ति है, वहीं भगवान का वास माना जाता है. इसी विश्वास के साथ श्रद्धालु भगवान के दर्शन और मोक्ष की कामना लेकर राजिम कुंभ कल्प में पहुंच रहे हैं. आस्था का यह महासंगम 15 फरवरी महाशिवरात्रि तक लगातार चलता रहेगा, जिसमें लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है.

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